🌿मौनी अमावस्या का दिन शांति, साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद खास माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किए गए कर्म और पूजा का असर गहरा और लंबे समय तक स्थायी रहता है। यह अवसर हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और जीवन में मानसिक संतुलन स्थापित करने का मौका देता है।
🌿कई बार हमारे जीवन में पितृ दोष के कारण परेशानियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। पितृ दोष उस स्थिति को कहते हैं जब पूर्वजों की असंतुष्ट आत्मा या अधूरी इच्छाएँ जीवन में बाधाएँ लाती हैं। इसके प्रभाव से पारिवारिक कलह, मानसिक अशांति, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ या आर्थिक कठिनाइयाँ हो सकती हैं। ऐसे समय पर पितृ दोष शांति के लिए विशेष पूजा करना लाभकारी माना जाता है। इस पूजा से जीवन में स्थिरता आती है, मानसिक शांति बढ़ती है और परिवार में सामंजस्य स्थापित होने की संभावना बढ़ती है।
🌿इस अवसर पर भगवान दत्तात्रेय की पूजा विशेष महत्व रखती है। उन्हें त्रिमूर्ति का रूप माना जाता है और वे गुरु और मार्गदर्शक के रूप में पूजे जाते हैं। मान्यता है कि वे पितृ दोष से जुड़ी परेशानियों को कम करने और जीवन में सही दिशा दिखाने में मदद करते हैं। इस पूजा में श्री गुरु चरित्र का पाठ और तिल तर्पण किया जाता है। गुरु चरित्र का पाठ आध्यात्मिक शक्ति और मार्गदर्शन प्रदान करता है, जबकि तिल तर्पण से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
🌿यह विशेष पूजा काशी के श्री दत्तात्रेय मंदिर में विधिपूर्वक आयोजित की जाएगी। यहाँ विद्वान पंडित मंत्रों का जाप और अनुष्ठान करेंगे। श्री मंदिर के माध्यम से भक्त घर बैठे भी ऑनलाइन इस पूजा में जुड़ सकते हैं और दत्तात्रेय की कृपा तथा पितृ शांति का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। यह अवसर उन सभी के लिए है जो अपने जीवन में मानसिक शांति, पारिवारिक सामंजस्य और पूर्वजों का आशीर्वाद पाना चाहते हैं।