🌙 सावन के आखिरी सोमवार को दक्षिण काशी के नाम से प्रसिद्ध गोकर्ण क्षेत्र में होने जा रहा है 11
ब्राह्मणों द्वारा 5 कुंड महारुद्र यज्ञ🔥
🙏 पूरे माह की तपस्या को साकार करने का यह दुर्लभ अवसर जाने न दें।✨
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का पवित्र समय माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आंतरिक स्थिरता का अवसर होता है, जिसमें श्रद्धालु पूरे महीने व्रत, संयम और श्रद्धा के साथ भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इस भक्ति में विशेष महत्व होता है सावन के सोमवारों का, जो शिव को समर्पित माने जाते हैं। और जब यह सोमवार सावन के अंतिम सप्ताह में आता है, तो उसका आध्यात्मिक प्रभाव और भी गहरा हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि पूरे महीने की साधना, मंत्र जाप और पूजा इसी अंतिम सोमवार को पूर्णता की ओर बढ़ती है। इस दिन ध्यान, जप और यज्ञ जैसे विशेष अनुष्ठानों के माध्यम से साधक अपने भीतर की शक्ति को स्थिर करने और शिव भक्ति को और गहरा करने का प्रयास करता है। इसी भाव को साकार करने के लिए गोकर्ण तीर्थ में 5 हवन कुंडों और 11 ब्राह्मणों के साथ विशेष महारुद्र यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
🔱 गोकर्ण क्षेत्र क्यों माना जाता है इस यज्ञ के लिए विशेष स्थल?
गोकर्ण को ‘दक्षिण काशी’ कहा जाता है। यह स्थान शिव साधना का एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध क्षेत्र माना गया है। मान्यता है कि रावण जब कैलाश से आत्मलिंग को लंका ले जा रहा था, तब देवताओं की युक्ति से यह लिंग गोकर्ण में ही स्थापित हो गया। तभी से यह तीर्थ शिव उपासना का विशेष केंद्र बना हुआ है।
🙏 आप भी जुड़ें इस दुर्लभ अवसर से
सावन के अंतिम सोमवार को श्रद्धा, शांति और शिव भक्ति के साथ इस महारुद्र यज्ञ में भाग लेना अपने जीवन की दिशा बदलने जैसा हो सकता है। यह अवसर न केवल मन की शुद्धि, बल्कि आत्मबल और आंतरिक स्थिरता पाने का भी माध्यम है। इसलिए श्री मंदिर के माध्यम से इस दिव्य अनुष्ठान का हिस्सा बनें और भगवान शिव के आशीर्वाद से अपने जीवन को एक नई ऊर्जा दें।