03 मार्च 2026 को वर्ष का पहला और एकमात्र पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। वैदिक परंपरा में चंद्र ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं माना जाता, बल्कि इसे एक शक्तिशाली ब्रह्मांडीय परिवर्तन के रूप में देखा जाता है, जो सीधे चंद्रमा को प्रभावित करता है। चंद्रमा मन, भावनाओं, स्थिरता और आंतरिक शांति का कारक माना गया है। जब चंद्रमा ग्रहण के प्रभाव में आता है, तो उसकी शीतल और पोषक ऊर्जा कुछ समय के लिए कमजोर मानी जाती है, जिससे भावनात्मक और मानसिक असंतुलन बढ़ सकता है।
मीन राशि के जातकों के लिए यह चंद्र ग्रहण विशेष रूप से गहरा प्रभाव डाल सकता है। मीन एक जल तत्व की संवेदनशील राशि है, जो अंतर्ज्ञान और भावनात्मक गहराई से जुड़ी होती है। चंद्रमा का प्रभाव आपके आंतरिक संसार पर अधिक होता है, इसलिए इस अवधि में भावनाएं तीव्र हो सकती हैं। मूड में उतार चढ़ाव, मन में बेचैनी, निर्णय लेने में भ्रम, नींद का प्रभावित होना या बिना स्पष्ट कारण चिंता का अनुभव संभव है। कुछ लोगों को ऊर्जा में कमी या तनाव से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं।
ऐसे समय में वैदिक शास्त्र चंद्र ग्रहण शांति पूजा की अनुशंसा करते हैं। यह एक पवित्र अनुष्ठान है, जिसका उद्देश्य ग्रहण के कारण उत्पन्न चंद्र अशांति को शांत कर संतुलन स्थापित करना है। इस विशेष पूजा में भगवान शिव के सोमेश्वर स्वरूप की आराधना की जाती है। सोमेश्वर, अर्थात चंद्र के स्वामी, की कृपा से मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन, उत्तम स्वास्थ्य और ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से रक्षा की कामना की जाती है।
यह पावन अनुष्ठान प्रयागराज स्थित श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर में संपन्न किया जाएगा, जो आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत स्थान माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण जैसे खगोलीय परिवर्तन के समय यहां की गई प्रार्थना विशेष फलदायी होती है। यदि आप भी इस पूर्णिमा पर आंतरिक शांति और भगवान शिव की कृपा का अनुभव करना चाहते हैं, तो श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष साधना में सहभागी बन सकते हैं और महादेव की दिव्य ऊर्जा से स्वयं को जोड़ सकते हैं। 🙏