3 फरवरी को चंद्र ग्रहण होने वाला है। खगोलीय रूप से यह वह समय होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान पूर्णिमा का उज्ज्वल चंद्रमा कुछ समय के लिए अपनी आभा बदलता हुआ दिखाई देता है। वैदिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का कारक माना गया है, इसलिए जब ग्रहण के समय उसकी रोशनी प्रभावित होती है तो उसका असर व्यक्ति की सोच और व्यवहार पर भी देखा जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण काल में मन अधिक संवेदनशील हो सकता है और भीतर छिपी हुई चिंताएं उभर सकती हैं।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है, लेकिन हर राशि पर उसका असर अलग प्रकार से दिखाई देता है। इसी क्रम में मिथुन राशि जोकि बुद्धि, संवाद और त्वरित निर्णय की राशि मानी जाती है। इस राशि के लोग सामान्यतः तेज दिमाग और तुरंत प्रतिक्रिया देने वाले होते हैं। परंतु जब चंद्र ऊर्जा प्रभावित होती है, तो यही तेज सोच कई बार अधिक चिंता और उलझन का रूप ले सकती है। ग्रहण के समय विचारों की गति असामान्य रूप से बढ़ सकती है, जिससे छोटी बातें भी मन पर भारी लगने लगती हैं।
मिथुन राशि के कुछ जातकों को ऐसा महसूस हो सकता है कि वे एक साथ कई बातों में उलझ रहे हैं। निर्णय लेने में असमंजस, बातचीत में गलतफहमी, या बिना कारण बेचैनी का अनुभव हो सकता है। कार्यक्षेत्र में ध्यान भटकना या अधूरे काम को लेकर दबाव भी बढ़ सकता है। यदि पहले से ही कोई मानसिक तनाव चल रहा हो तो ग्रहण काल में वह थोड़ा अधिक महसूस हो सकता है। इसलिए इस समय विशेष सावधानी और आत्मसंयम की आवश्यकता होती है।
इन्हीं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मिथुन राशि के लिए चंद्र ग्रहण शांति पूजा का आयोजन सोमेश्वर महादेव मंदिर, प्रयागराज में किया जा रहा है। भगवान शिव को देवों के देव महादेव माना जाता है और ऐसा विश्वास है कि उनकी आराधना से मन की अशांति शांत होती है। इस पूजा में मंत्र जप और विशेष संकल्प के माध्यम से चंद्र तत्व को संतुलित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ग्रहण के दौरान मानसिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। यदि आप भी इस विशेष पूजा में सहभागी बनना चाहते हैं, तो श्री मंदिर के माध्यम से अपना संकल्प जुड़वाकर इस आध्यात्मिक आयोजन का हिस्सा बन सकते हैं।