एक ऐसा दिव्य दिन आने वाला है जो आपके जीवन की दिशा बदल सकता है — वह पावन समय जब चंद्र ग्रहण की शक्तिशाली ऊर्जा के माध्यम से आपकी कुंडली में बने चंद्रमा से जुड़े राजयोगों को जागृत करने का विशेष अवसर प्राप्त होता है। वैदिक मान्यता के अनुसार ग्रहण का काल साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक अनुष्ठान के लिए अत्यंत प्रभावशाली होता है, क्योंकि इस समय ग्रहों की ऊर्जा सूक्ष्म स्तर पर अधिक सक्रिय हो जाती है। विशेष रूप से चंद्र ग्रहण मन, भाग्य और भावनात्मक शक्ति को प्रभावित करता है, इसलिए इस समय किया गया चंद्र से संबंधित अनुष्ठान जीवन में गहरा और सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय चंद्रमा अमृत के साथ प्रकट हुए और भगवान शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण कर पूरी सृष्टि को शीतलता प्रदान की। इसी कारण चंद्रमा को मन, मान-सम्मान, सुख और सामाजिक पहचान का कारक माना गया है। जब ग्रहण के समय चंद्र ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय होती है, तब यह केवल एक खगोलीय घटना नहीं रहती, बल्कि साधना के माध्यम से भाग्य को जागृत करने का पवित्र अवसर बन जाती है। यही वह समय होता है जब कुंडली में बने शुभ योग जागृत होने की क्षमता रखते हैं।
ज्योतिष में राजयोग का अर्थ केवल धन-दौलत नहीं, बल्कि जीवन में राजा जैसे गुणों का प्रकट होना होता है — जैसे सम्मान, स्थिर आय, सही निर्णय लेने की शक्ति, करियर में सफलता और समाज में पहचान। जब कुंडली का कोई राजयोग सक्रिय होता है, तब व्यक्ति को सही समय पर अवसर मिलने लगते हैं और उसके प्रयासों का फल जल्दी दिखाई देने लगता है। यदि यह योग धन से जुड़ा हो तो आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, करियर से जुड़ा हो तो पद और प्रतिष्ठा बढ़ती है और मन से जुड़ा हो तो आत्मविश्वास और संतुलन प्राप्त होता है।
यह विशेष चंद्र ग्रहण राजयोग सक्रियण 1008 चंद्र कवच पाठ अनुष्ठान चंद्रमा से बनने वाले प्रमुख राजयोग- जैसे गजकेसरी राजयोग को जागृत करने की भावना से किया जाता है। गजकेसरी राजयोग को अत्यंत शुभ माना गया है, जो व्यक्ति को सम्मान, ज्ञान, समृद्धि और प्रभाव प्रदान करता है। ग्रहण काल की परिवर्तनकारी ऊर्जा के साथ किया गया चंद्र कवच पाठ मन को स्थिर करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और भाग्य के द्वार खोलने का माध्यम बनता है।
यह अनुष्ठान श्री नवग्रह शनि मंदिर में संपन्न हो रहा है, जहाँ चंद्र देव की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा और शनि की ऊर्जा संतुलित होती है, तब जीवन में स्थिरता, धैर्य और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। इससे मानसिक तनाव कम होता है, करियर में आने वाली रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और व्यक्ति को अपने परिश्रम का स्थायी फल मिलने लगता है। चंद्रमा की शीतलता और शनि की कर्मप्रधान शक्ति का यह संगम राजयोगों को स्थिर रूप से फल देने वाला माना जाता है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस दिव्य साधना में अपने नाम से संकल्प जोड़कर आप भी चंद्रमा से जुड़े राजयोगों की सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करने का पावन अवसर प्राप्त कर सकते हैं। यह केवल एक पूजा नहीं, बल्कि समृद्धि, सफलता, सम्मान और आत्मविश्वास के नए द्वार खोलने की आध्यात्मिक साधना है, जो आपके प्रयासों को सही दिशा और स्थिर फल देने की भावना से की जाती है। ✨