🌕 चंद्र ग्रहण – जब साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है
सनातन धर्म में चंद्र ग्रहण को बहुत ही शक्तिशाली आध्यात्मिक समय माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण काल में की गई पूजा और जप कोटि पुण्य फल प्रदान करते हैं, यानी इस समय की गई प्रार्थना का फल कई गुना बढ़ जाता है। जब यह दुर्लभ समय फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के साथ आता है, तब इसकी महत्ता और भी अधिक मानी जाती है। जो लोग करियर में अस्थिरता, बार-बार काम में रुकावट, अचानक नुकसान या अनचाहे झटकों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए ऐसा पावन मुहूर्त माँ दुर्गा की कृपा और सुरक्षा पाने का एक विशेष अवसर माना जाता है।
🌺 दुर्गा सप्तशती – सर्वोच्च रक्षा शक्ति का आह्वान
दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य), जिसका वर्णन मार्केण्ड्य पुराण में मिलता है, 13 अध्यायों का पवित्र पाठ है। इसमें माँ दुर्गा की दुष्ट शक्तियों पर विजय का वर्णन है। परंपरा के अनुसार, यह पाठ सुरक्षा, साहस और जीवन की बड़ी कठिनाइयों को दूर करने के लिए किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि केवल देवी कवच, अर्गला स्तोत्र या कीलक स्तोत्र का पाठ करने से भी भक्त के चारों ओर एक दिव्य सुरक्षा घेरा बनता है, जो नकारात्मकता से रक्षा करता है। जब दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ कवच, अर्गला और कीलक के साथ किया जाता है, तब इसकी शक्ति और बढ़ जाती है। इससे मानसिक भय, अस्थिरता और बार-बार आने वाली समस्याओं से राहत पाने की प्रार्थना की जाती है।
कलियुग में यह माना जाता है कि नियमित साधना से कठिनाइयों में जल्दी राहत मिलती है। एक नवचंडी अनुष्ठान में दुर्गा सप्तशती का 9 बार पूरा पाठ किया जाता है। इस विशेष अवसर पर यह अनुष्ठान चार बार किया जाएगा, यानी कुल 36 बार दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ होगा। इस प्रकार पवित्र ग्रहण काल में 36 दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ अर्गला, कीलक और कवच स्तोत्र संपन्न किए जाएंगे।
यह विशेष अनुष्ठान नव दुर्गा मंदिर, कटरा में संपन्न होगा। यह स्थान शक्ति उपासना और माँ दुर्गा की भक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर माँ दुर्गा के नौ रूपों, यानी नव दुर्गा को समर्पित है। नव दुर्गा की पूजा को संपूर्ण सुरक्षा देने वाला माना जाता है – चाहे वह मन की अशांति हो, काम में अस्थिरता हो या अदृश्य रुकावटें, सभी के लिए यह नव दुर्गा पूजा कल्याणकारी है।
श्री मंदिर के माध्यम से चंद्र ग्रहण के दौरान नव दुर्गा मंदिर में दुर्गा सप्तशती पाठ करवाना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस समय का पावन योग, कई बार किया गया पाठ और पवित्र स्थान – इन सबका एक साथ बहुत प्रभाव माना जाता है।