कई बार जीवन लगातार चुनौतियों से घिरा हुआ लगता है, जैसे आर्थिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, रिश्तों में दूरी, करियर में रुकावट, कानूनी उलझन या मनोकामनाओं का अधूरा रह जाना। मेहनत के बाद भी जब जीवन में प्रगति दिखाई नहीं देती तो मन में चिंता और अस्थिरता बढ़ने लगती है। शास्त्रों में कहा गया है कि ऐसा तब होता है जब हमारी आंतरिक ऊर्जा और ग्रहों का संतुलन ठीक नहीं रहता। ऐसे समय में चंद्र ग्रहण जैसे दिव्य संयोग को आध्यात्मिक परिवर्तन का दुर्लभ अवसर माना जाता है। आकाश में दिखाई देने वाला यह अंधकार वास्तव में साधना की प्रबल ऊर्जा का समय होता है, जब बाधाओं को शांत कर जीवन में संतुलन स्थापित करने की प्रार्थना की जाती है।
श्री मंदिर द्वारा इस विशेष चंद्र ग्रहण पर एक अद्वितीय महाअनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान 111 विद्वान ब्राह्मण सामूहिक रूप से ‘ॐ नमः शिवाय’ पंचाक्षरी मंत्र का 21 लाख बार जाप करेंगे और साथ ही 10,000 चंद्र मूल मंत्रों का जाप किया जाएगा।
आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी मंत्र का 5 लाख बार विधि-पूर्वक जाप पूरा होता है, तो उसकी दिव्य शक्ति जागृत होने लगती है। इस महाअनुष्ठान में ऐसा चार बार संपन्न होगा, जिससे मंत्र की ऊर्जा कई गुना बढ़ने का भाव जुड़ा है। जब मंत्र जागृत और सिद्ध अवस्था में स्थापित होता है, तब उसे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों- धन, करियर, स्वास्थ्य, रिश्ते और अन्य चुनौतियों में सकारात्मक प्रभाव देने वाला माना जाता है।
कथा के अनुसार, चंद्र ग्रहण के समय भगवान शिव ने चंद्रमा को अंधकार से रक्षा प्रदान की थी। उसी भाव से यह मंत्र जाप भक्त के चारों ओर एक दिव्य सुरक्षा ऊर्जा का निर्माण करने की प्रार्थना के रूप में किया जाता है, जो कर्म संबंधी बाधाओं को शांत कर जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग खोलता है। इस महाअनुष्ठान में दी जाने वाली प्रत्येक आहुति और प्रत्येक मंत्र जाप जीवन की वास्तविक समस्याओं के समाधान, जैसे कर्ज़ से राहत, करियर में प्रगति, रिश्तों में मधुरता, मानसिक शांति और घर-परिवार में सुख-समृद्धि के लिए की जाने वाली सामूहिक प्रार्थना का प्रतीक है।
इस विशाल अनुष्ठान की विशेषता यह है कि इसकी सामूहिक शक्ति के सामने कोई भी समस्या बड़ी नहीं मानी जाती। दिव्य ग्रहण काल, सिद्ध मंत्र और पुरश्चरण की प्रक्रिया मिलकर इसे जीवन में परिवर्तन लाने वाला आध्यात्मिक अवसर बनाती है, जहाँ संघर्ष को सफलता में और अंधकार को प्रकाश में बदलने की भावना जुड़ी है। यह केवल एक पूजा नहीं, बल्कि भगवान शिव और चंद्र ग्रहण की दिव्य ऊर्जा के साथ अपने जीवन की दिशा को सकारात्मक बनाने का ऐतिहासिक अवसर माना जाता है।