कई बार जीवन में पूरी मेहनत और सही दिशा होने के बाद भी स्थिरता का अनुभव नहीं होता। करियर में रुकावटें आती हैं, धन का प्रवाह टिक नहीं पाता और परिवार में मन की शांति अधूरी लगती है। सनातन परंपरा में ऐसी स्थितियों को पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है, जब पूर्वजों की स्मृति, कृतज्ञता और उनके कल्याण के लिए किए जाने वाले कर्म अधूरे रह जाते हैं। माना जाता है कि जब पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, तब जीवन में संतुलन, स्पष्टता और स्थिरता अपने आप आने लगती है।
चंद्र ग्रहण का समय पितृ कर्मों के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। इस काल में किए गए मंत्र जाप और दान का फल सूक्ष्म रूप से पूर्वजों तक पहुँचता है और उनके आशीर्वाद का मार्ग खुलता है। यह समय अपनी वंश परंपरा के प्रति आभार व्यक्त करने और उनके कल्याण की प्रार्थना करने का दिव्य अवसर माना जाता है।
इसी पावन संयोग में 1,25,000 पितृ गायत्री मंत्र जाप और पितृ पंच महादान अनुष्ठान के साथ 7 पीढ़ी पितृ दोष शांति 51 ब्राह्मण चंद्र ग्रहण पूजा का आयोजन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में किया जा रहा है। निरंतर मंत्र जाप पितरों की शांति और संतोष के लिए किया जाता है, जबकि पंच महादान उनकी तृप्ति और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। यह अनुष्ठान पीढ़ियों के बीच एक आध्यात्मिक सेतु बनाकर जीवन में संरक्षण, मार्गदर्शन और स्थिरता का भाव उत्पन्न करता है।
✨ त्रिवेणी संगम का दिव्य महत्व
प्रयागराज का त्रिवेणी संगम वह पवित्र स्थान है जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है। पुराणों के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने यहीं पहला यज्ञ किया था, इसलिए इसे तीर्थराज कहा गया। यह स्थान तप, ज्ञान, शुद्धि और दिव्य ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। यहाँ किए गए पितृ कर्म पूर्वजों तक शीघ्र पहुँचते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में संतुलन और शांति का अनुभव होता है।
माना जाता है कि जब पितरों का सम्मान इस प्रकार किया जाता है, तब जीवन की रुकावटें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और करियर, धन तथा रिश्तों में स्थिरता का भाव आता है। मन हल्का होता है और प्रयासों का फल मिलने लगता है।
श्री मंदिर के माध्यम से आप अपने परिवार सहित इस पावन चंद्र ग्रहण पितृ शांति अनुष्ठान से जुड़कर अपनी सात पीढ़ियों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में दीर्घकालीन संतुलन व सुख-समृद्धि का अनुभव कर सकते हैं। 🙏