🔱 कई बार जीवन में आर्थिक परेशानियाँ ऐसी हो जाती हैं कि एक कर्ज खत्म होता है तो दूसरा सामने आ जाता है। यह बोझ सिर्फ खर्चों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, यात्रा और स्वास्थ्य तक को प्रभावित करने लगता है। ठीक वैसे ही जैसे पुराणों में रक्तबीज की हर बूंद से नया असुर उत्पन्न हो जाता था, वैसे ही जीवन में एक समस्या दूसरी को जन्म देती हुई दिखाई देती है। सीमित आय में कर्ज चुकाना और घर की जिम्मेदारियाँ निभाना पूरे परिवार को मानसिक रूप से थका देता है। ऐसी स्थिति में दुर्गा अष्टमी के दिन, जो इस बार मंगलवार को पड़ रही है, माँ चामुंडा की 1,00,008 अनार आहुति और रक्त-चंदन अभिषेक का यह विशेष अनुष्ठान अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
माँ काली शक्ति, समय और परिवर्तन की अधिष्ठात्री देवी हैं और उनके उग्र स्वरूप को माँ चामुंडा के रूप में पूजा जाता है। उनकी उपासना केवल बाहरी बाधाओं को दूर करने के लिए ही नहीं, बल्कि भीतर छिपे भय, अहंकार और नकारात्मक प्रवृत्तियों को शांत करने के लिए भी की जाती है। 1,00,008 अनार की आहुति अर्पित करना अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली साधना मानी जाती है। शास्त्रों में अनार को जीवन शक्ति, समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक बताया गया है। मंत्रों के साथ अर्पित यह अनुष्ठान अचानक बढ़ती आर्थिक समस्याओं, मानसिक तनाव और बार-बार आने वाले संकटों को शांत करने का माध्यम माना जाता है। इसके साथ किया जाने वाला रक्त-चंदन अभिषेक देवी की उग्र ऊर्जा को संतुलित कर साधक के जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और साहस स्थापित करने का भाव रखता है।
🔱 देवी भागवत और दुर्गा सप्तशती में माँ काली और रक्तबीज की कथा का वर्णन मिलता है। रक्तबीज को वरदान था कि उसकी हर बूंद से नया असुर उत्पन्न होगा। जब देवताओं के लिए उसे रोकना कठिन हो गया, तब माँ दुर्गा ने काली रूप धारण किया और उसका रक्त भूमि पर गिरने से पहले ही पी लिया। अंततः रक्तबीज का अंत हुआ और भक्तों को बढ़ती हुई समस्याओं से राहत का आशीर्वाद मिला।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित माँ चामुंडा देवी सिद्धपीठ अत्यंत प्राचीन और शक्तिशाली स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यहीं माँ ने चंड-मुंड का वध किया था, जिससे यह स्थल शक्ति और संरक्षण का केंद्र बन गया। यहाँ किया जाने वाला रक्त-चंदन अभिषेक साहस, आत्मविश्वास और नकारात्मक ऊर्जा के नाश का प्रतीक है। श्रद्धा से किया गया यह अनुष्ठान बार-बार बढ़ते कर्ज, बाधाओं और शत्रु प्रभाव से रक्षा करते हुए समृद्धि, आंतरिक शक्ति और स्थिरता के द्वार खोलने का माध्यम माना जाता है।
⭐ इस पावन दुर्गा अष्टमी, जो मंगलवार को आ रही है, श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष पूजा में जुड़कर माँ चामुंडा की कृपा प्राप्त करें और जीवन की बढ़ती आर्थिक समस्याओं से राहत का मार्ग पाएँ।