🌟 सनातन परंपरा में गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। बृहस्पति जी ज्ञान, धर्म, सही निर्णय और समृद्धि के प्रतीक हैं। इस दिन की गई पूजा और प्रार्थना व्यक्ति के विचारों को स्थिर करने, जीवन में संतुलन लाने और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि गुरुवार की आराधना से जीवन में स्थिरता और दीर्घकालिक प्रगति का मार्ग खुलता है।
🌟 ज्योतिष मान्यता के अनुसार जब कुंडली में बृहस्पति राहु के साथ प्रभावित होते हैं, तो गुरु-चांडाल दोष बनता है। यह स्थिति व्यक्ति के निर्णय में भ्रम, कामों में देरी और अचानक आने वाली बाधाओं से जुड़ी मानी जाती है। राहु को भ्रम और अनिश्चितता का प्रतीक माना गया है, जबकि बृहस्पति सत्य और उच्च ज्ञान का प्रतिनिधित्व करते हैं। गुरुवार के दिन इन दोनों ग्रहों की संयुक्त पूजा से उनके प्रभावों में संतुलन स्थापित करने की भावना जुड़ी है, जिससे व्यक्ति स्पष्ट सोच और धैर्य के साथ जीवन की परिस्थितियों का सामना कर सके।
🌟 इस पावन गुरुवार को 18,000 राहु मूल मंत्र जाप और 16,000 बृहस्पति मूल मंत्र जाप का विशेष अनुष्ठान हवन उज्जैन स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर में किया जा रहा है। यह मंदिर ग्रह शांति और मानसिक स्थिरता के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। श्रद्धा से किया गया यह अनुष्ठान मन की अशांति को शांत करने, जीवन की दिशा को स्पष्ट करने और परिवार के लिए स्थिर समृद्धि की कामना से जुड़ा है।
🌟 श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष पूजा में शामिल होकर भक्त देवगुरु बृहस्पति और राहु देव से प्रार्थना कर सकते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से की गई यह आराधना मन को स्थिर करती है, अदृश्य बाधाओं को कम करती है और जीवन में संतुलन व स्पष्टता लाने में सहायक होती है।