📜 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु-गुरु की युति से बनने वाले योग को गुरु चांडाल योग कहा जाता है। इसे बहुत ही अशुभ योग माना गया है क्योंकि इस अशुभ योग के बनने से कुंडली में मौजूद शुभ योग भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे जीवन में परेशानियों का सिलसिला शुरू हो जाता है। शास्त्रों में राहु को एक प्रभावशाली ग्रह माना गया है, जो व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर डाल सकता है। इसे आम तौर पर अशुभ परिणामों का कारक माना जाता है, क्योंकि यह समृद्धि और भौतिक कल्याण में बाधा उत्पन्न करता है और सामाजिक कलंक जैसी समस्याएं भी ला सकता है। इसलिए साल 2026 के गुरुवार और राहु शासित शतभिषा नक्षत्र संयोग में 18,000 राहु मूल मंत्र जाप, 16,000 बृहस्पति मूल मंत्र साधना होने जा रही है, जो अपने आप में स्वर्णिम अवसर है।
📜 ऐसा माना जाता है कि राजस्थान का श्री बृहस्पति धाम, राहु और बृहस्पति की युति से होने वाले बुरे असर को कम करने के लिए एक बहुत ही प्रभावशाली जगह है। जब इस पूजा में 18,000 राहु मूल मंत्र जाप किए जाते हैं, तो इस पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा से राहु के अशुभ परिणाम, सफलता और तरक्की में बदल सकते हैं। यह पूरे साल के लिए 2 ग्रहों से शुभ फल पाने का सुनहरा मौका है, इसे अपने हाथ से जाने न दें। समृद्धि और स्थिरता की कामना के साथ आप इस महापूजा में अपने पार्टनर के साथ भी शामिल हो सकते हैं। इस बार यह महापूजा गुरुवार और राहु शासित शतभिषा नक्षत्र काल में जयपुर के दिव्य बृहस्पति धाम में संपन्न होगी।
📜 एक पौराणिक कथा है, जिसमें बताया गया है कि समुद्र मंथन के दौरान स्वरभानु ने देवताओं का रूप धारण करके अमृत पीने का प्रयास किया। लेकिन भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। स्वरभानु का सिर राहु और धड़ केतु के रूप में जीवित रह गया। मान्यता के अनुसार, स्वरभानु का सिर जहां गिरा, वहीं यह मंदिर स्थापित हुआ। बृहस्पति देव के जयपुर स्थित धाम में पूजा करने से राहु के साथ बृहस्पति के अशुभ प्रभाव को भी कम किया जा सकता है। मान्यता है कि 18,000 राहु मूल मंत्र जाप, 16,000 बृहस्पति मूल मंत्र जाप और हवन के माध्यम से समृद्धि और भौतिक कल्याण का आशीर्वाद पाया जा सकता है।
🌿तो देर न करें… श्री मंदिर के माध्यम से इस अनुष्ठान में भाग लें और राहु-गुरु के नकारात्मक प्रभावों से राहत का दिव्य आशीष पाएं।