सनातन धर्म में लगभग 12 वर्षों बाद बनने वाला यह दुर्लभ और अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह संयोग विशेष माना जा रहा है, जब देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में गोचर करेंगे। इस समय बनने वाला राहु-गुरु विशेष योग जीवन में गहरे कर्म प्रभावों को शांत करने, ग्रहों के असंतुलन को कम करने और लंबे समय से चल रही अस्थिरता को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
इसी पवित्र अवसर पर “बृहस्पति-राहु गुरु चांडाल दोष निवारण महापूजा” का आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष अनुष्ठान राहु से जुड़ी परेशानियों, जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं, निर्णय लेने में भ्रम, मानसिक अस्थिरता और ग्रहों के अशुभ प्रभावों से बनने वाले गुरु चांडाल दोष को शांत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु को भ्रम, अचानक बदलाव, भय, अधिक सोच-विचार, कर्मों के उतार-चढ़ाव और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना जाता है। वहीं देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, धर्म, सही मार्गदर्शन, समृद्धि और जीवन में स्थिर उन्नति के प्रतीक माने जाते हैं। जब कुंडली में इन दोनों ग्रहों का संतुलन बिगड़ जाता है, तब व्यक्ति के जीवन में अस्थिरता, देरी, भ्रम और सही दिशा की कमी महसूस होने लगती है। इसलिए यह दुर्लभ ग्रह संयोग इन दोनों शक्तिशाली ग्रहों के संतुलन को पुनः स्थापित करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस महा अनुष्ठान में 4,00,000 राहु मंत्र जाप, 3,00,000 बृहस्पति मंत्र जाप और वैदिक विधि से विशेष हवन किया जाएगा। मंत्र जाप के माध्यम से ग्रहों की शुभ ऊर्जा को जागृत किया जाता है, जबकि हवन को गहरे कर्म प्रभावों और राहु से जुड़ी नकारात्मकता को शांत करने का प्रभावशाली माध्यम माना जाता है। अंक शास्त्र के अनुसार राहु का अंक 4 और बृहस्पति का अंक 3 माना जाता है, इसलिए इस अनुष्ठान में इन ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए विशेष संख्या संयोजन का भी महत्व रखा गया है।
यह पूजा विशेष रूप से जीवन में स्थिरता प्राप्त करने, राहु से उत्पन्न परेशानियों को कम करने, बार-बार आने वाली बाधाओं को दूर करने, विचारों और निर्णयों में स्पष्टता लाने, करियर और आर्थिक स्थिति में सुधार तथा गुरु चांडाल दोष की प्रभावी शांति के लिए की जा रही है।
अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न होने वाला यह दुर्लभ राहु-गुरु संयोग भक्तों के लिए लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से राहत, कर्म शांति और अधिक संतुलित, स्थिर एवं सकारात्मक जीवन की दिशा में दिव्य कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जा रहा है।