कभी-कभी जीवन ऐसे मोड़ पर आकर रुक सा जाता है, जहाँ सब कुछ पास आकर भी पूरा नहीं हो पाता। जब जीवनसाथी की तलाश लंबी हो जाए या रिश्तों में बार-बार रुकावट आए, तो मन में बेचैनी बढ़ने लगती है। ज्योतिष के अनुसार जब बृहस्पति ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तब विवाह में देरी, रिश्तों में तनाव और जीवनसाथी से जुड़ी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। ऐसे समय सही विधि से पूजा करना लाभकारी माना जाता है। इसी उद्देश्य से इस गुरुवार उज्जैन के पावन श्री नवग्रह शनि मंदिर में बृहस्पति गुरु ग्रह यज्ञ, विष्णु सहस्रनाम पाठ और केले के वृक्ष की पूजा का आयोजन किया जा रहा है, जो अपने आप में एक शुभ अवसर है।
शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान विष्णु की उपासना बृहस्पति को शांत करने का प्रभावी मार्ग मानी जाती है, क्योंकि भगवान विष्णु को देवगुरु का प्रतिनिधि माना जाता है। इसी मान्यता के आधार पर इस पवित्र मंदिर में विशेष अनुष्ठानों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसमें बृहस्पति ग्रह शांति यज्ञ, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और गुरुवार को की जाने वाली पारंपरिक केले के वृक्ष की पूजा शामिल है। विष्णु सहस्रनाम, जिसमें भगवान विष्णु के हजार नाम हैं, महाभारत में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया था। इसका श्रद्धा से पाठ करने से यश, समृद्धि और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। केले के वृक्ष की पूजा से इन अनुष्ठानों का फल और बढ़ता है और भक्तों की प्रार्थनाएँ भगवान तक सरलता से पहुँचती हैं। विद्वानों का मानना है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और रिश्तों में सुख, शांति और मधुरता बढ़ती है।
यह अनुष्ठान केवल विवाह में देरी या रिश्तों की कड़वाहट कम करने तक सीमित नहीं है। यह सही जीवनसाथी के चयन में मार्गदर्शन देने और वर्तमान व भविष्य के रिश्तों में बेहतर सामंजस्य बनाने में भी सहायक माना जाता है। इस पूजा से दंपतियों के बीच प्रेम, सम्मान और समझ की भावना मजबूत होती है, जिससे मतभेद कम होते हैं। जब बृहस्पति दोष शांत होता है, तब जीवन में बिना रुकावट आगे बढ़ने और आदर्श जीवनसाथी के साथ स्थिर जीवन की दिशा मिलने लगती है, जिसे पूरे जीवन का आशीर्वाद माना जाता है।
आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इन पवित्र अनुष्ठानों में भाग लेकर देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की संयुक्त कृपा से संतुलित और समृद्ध जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करें।