🌼 बसंत पंचमी ज्ञान, कला और नव चेतना का पावन पर्व है, जो ऋतुराज बसंत के आगमन और मां सरस्वती की उपासना का प्रतीक माना गया है। इस दिन प्रकृति में नई ऊर्जा, उल्लास और सृजनात्मकता का संचार होता है। श्वेत एवं पीत वस्त्र धारण कर मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या, बुद्धि, वाणी और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। शास्त्रों में बसंत पंचमी को शिक्षा का आरंभ, विद्यारंभ संस्कार और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी बताया गया है। मां सरस्वती की कृपा से अज्ञान का नाश संभव है और जीवन में विवेक, अनुशासन के साथ मानसिक शांति का विकास होता है।
🌼इस अनुष्ठान में शामिल सरस्वती सहस्रनाम अर्चना, मां सरस्वती की उपासना का अत्यंत शक्तिशाली और शास्त्रसम्मत स्वरूप है। सहस्रनामों में देवी के एक-एक नाम के माध्यम से उनके ज्ञान, वाणी, बुद्धि और सृजनात्मक शक्ति का आह्वान किया जाता है। बसंत पंचमी पर यह अर्चना विशेष रूप से स्टुडेंट्स, कलाकारों, लेखकों और साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी गई है। नियमित या विशेष तिथि पर की गई सहस्रनाम अर्चना से स्मरण शक्ति, एकाग्रता और विवेक में वृद्धि होती है। शास्त्रों के अनुसार, मां सरस्वती के सहस्र नामों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण अज्ञान, मानसिक भ्रम और वाणी दोष का निवारण कर जीवन में शुद्ध ज्ञान, शांति और दिव्य प्रकाश का संचार कर सकता है।
🌼 बसंत पंचमी के दिव्य काल में कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर में 11 किलो घी से श्री सूक्तम हवन अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी अनुष्ठान माना जाता है। ऋतु परिवर्तन के इस शुभ पर्व पर किया गया श्री सूक्तम हवन देवी लक्ष्मी की कृपा को शीघ्र आकर्षित करता है। वैदिक श्री सूक्त के मंत्रों के साथ 11 किलो शुद्ध घी की आहुति समृद्धि, ऐश्वर्य और आर्थिक स्थिरता का शक्तिशाली आह्वान करती है। कोल्हापुर महालक्ष्मी क्षेत्र की सिद्ध ऊर्जा इस हवन को और प्रभावशाली बनाती है। शास्त्रों के अनुसार, बसंत पंचमी पर किया गया यह विशेष हवन दरिद्रता, धन अटकाव और सौभाग्य अवरोध को दूर कर जीवन में शुभ अवसर, स्थायी लक्ष्मी और पारिवारिक सुख का संचार करने की शक्ति रखता है।
✨ श्री मंदिर के माध्यम से इस वर्षांत महालक्ष्मी अनुष्ठान में भाग लें और मां लक्ष्मी से धन, आनंद, राहत और नए वर्ष में चारों दिशाओं से उन्नति की प्रेरक कृपा प्राप्त करें।