अधिक मास को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली समय माना जाता है। इस पूरे मास में की गई साधना, जप और पूजा का प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। इसी अधिक मास में आने वाली दुर्गा अष्टमी का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह दिन देवी शक्ति की उपासना के लिए विशेष माना जाता है।
इस पावन अवसर पर माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यंगिरा की संयुक्त पूजा का आयोजन किया जा रहा है, जो भक्तों को नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और जीवन की अदृश्य बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
माँ बगलामुखी को दशमहाविद्याओं में एक अत्यंत शक्तिशाली देवी माना जाता है। उन्हें “स्तंभन शक्ति” की देवी कहा जाता है, अर्थात वे शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और नकारात्मक प्रभाव को नियंत्रित करने की क्षमता रखती हैं। वहीं माँ प्रत्यंगिरा को एक ऐसी दिव्य शक्ति माना जाता है, जो अत्यंत तीव्र नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों को शांत करने में सहायक होती हैं। जब इन दोनों देवियों की उपासना एक साथ की जाती है, तो यह साधना एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच का निर्माण करती है, जो भक्त के जीवन को हर प्रकार की नकारात्मकता से बचाने में सहायक होती है।
इस विशेष अनुष्ठान में 36 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा 1,25,000 बगलामुखी मूल मंत्र का जाप किया जाएगा। इतनी बड़ी संख्या में मंत्र जाप को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि इससे उत्पन्न होने वाली ऊर्जा व्यक्ति के जीवन में गहराई से सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होती है।
इसके साथ ही बगलामुखी–प्रत्यंगिरा कवच का पाठ किया जाएगा, जो एक शक्तिशाली आध्यात्मिक रक्षा स्तोत्र माना जाता है। यह कवच नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और अनचाहे प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक माना जाता है। इस अनुष्ठान का एक महत्वपूर्ण भाग हवन भी है, जिसमें मंत्रों के साथ आहुति देकर वातावरण को शुद्ध किया जाता है। हवन के माध्यम से उत्पन्न ऊर्जा भक्तों के जीवन में सकारात्मकता, शांति और सुरक्षा का संचार करती है।
यह सम्पूर्ण पूजा हरिद्वार स्थित माँ बगलामुखी मंदिर में संपन्न की जाएगी, जो एक सिद्ध और अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है। माँ गंगा के तट पर स्थित यह मंदिर वर्षों से साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रहा है। यहां की गई पूजा का प्रभाव विशेष रूप से अधिक माना जाता है, क्योंकि इस स्थान की दिव्य ऊर्जा साधना को और अधिक प्रभावशाली बनाती है।
अधिक मास की दुर्गा अष्टमी पर किया गया यह विशेष अनुष्ठान भक्तों को एक ऐसा अवसर प्रदान करता है, जिसमें वे अपने जीवन की नकारात्मकता, भय और बाधाओं को दूर कर एक सुरक्षित और सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ सकते हैं।
श्री मंदिर के माध्यम से आप भी इस दिव्य पूजा में भाग लेकर माँ बगलामुखी और माँ प्रत्यंगिरा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुरक्षा, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं।