🪔 मां बगलामुखी को संपूर्ण सृष्टि की “स्तंभन शक्ति” माना जाता है, जिनकी उपासना नकारात्मकता को शांत करने, बाधाओं को दूर करने और भक्तों को दिव्य सुरक्षा देने के लिए की जाती है। बगलामुखी जयंती का दिन विशेष रूप से उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन मां की ऊर्जा जागृत मानी जाती है, जिससे की गई पूजा और प्रार्थना का प्रभाव अधिक फलदायी होता है।
इस विशेष अनुष्ठान में 36 कन्याओं का सम्मान किया जाता है। उन्हें भोजन कराया जाता है और पीले वस्त्र दान किए जाते हैं। यह कन्याएं पवित्रता, श्रद्धा और मां बगलामुखी की दिव्य शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। मां बगलामुखी का 36 अक्षरों वाला मंत्र भी बताया गया है, इसलिए उनकी पूजा में 36 संख्या का विशेष महत्व माना जाता है। इस पूजा में इन 36 कन्याओं को मां बगलामुखी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है।
मां बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें पीतांबरा भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “पीले वस्त्र धारण करने वाली देवी।” इसी कारण इस अनुष्ठान में कन्याओं को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इस प्रकार किया गया कन्या पूजन मां की पसंद के अनुसार होने के कारण और भी विशेष और फलदायी माना जाता है।
इसके साथ ही बगलामुखी रक्षा अनुष्ठान भी किया जाता है, जिसमें मंत्र जाप, हवन और विशेष प्रार्थनाएं शामिल होती हैं। यह पूरी प्रक्रिया एक सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण बनाती है, जो साधक के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और स्पष्ट सोच लाने में सहायक मानी जाती है।
इस विशेष पूजा के माध्यम से भक्त अपने जीवन में समृद्धि, परिवार में सुख-शांति, बाधाओं में कमी और दिव्य सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। 36 कन्या पूजा, पीले वस्त्र दान और रक्षा अनुष्ठान के माध्यम से मां बगलामुखी की कृपा को विशेष रूप से प्राप्त करने की भावना जुड़ी होती है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से इस पवित्र बगलामुखी जयंती 36 कन्या पूजा और रक्षा अनुष्ठान में आप और आपका परिवार भी शामिल होकर प्रसाद प्राप्त कर सकते हैं और मां बगलामुखी की कृपा से अपने जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और सुख-शांति का अनुभव कर सकते हैं।