🔱 दतिया स्थित श्री पीतांबरा पीठ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन परंपरा में माँ बगलामुखी की विशेष शक्ति का अत्यंत प्रभावशाली केंद्र माना जाता है। इसे बगलामुखी पीठ भी कहा जाता है। पुराने समय में राजा, योद्धा, शासक और न्याय की तलाश करने वाले लोग कठिन परिस्थितियों में यहाँ आकर माँ बगलामुखी की आराधना करते थे। मंदिर परंपरा के अनुसार, बड़े संघर्षों के समय यहाँ विशेष हवन किए गए, जिनसे विरोधी शक्तियाँ शांत हुईं और धर्म की रक्षा हुई। गुप्त नवरात्रि के पहले दिन की गई पूजा को यहाँ विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि इस दिन नकारात्मकता और विरोध को शांत करने की शक्ति अधिक प्रभावी होती है।
🔱 जब कानूनी मामले लंबे समय तक चलते रहते हैं, विरोधी सक्रिय हो जाते हैं या झूठे आरोप मन की शांति को प्रभावित करने लगते हैं, तब व्यक्ति स्वयं को कमजोर महसूस करने लगता है। मान्यता है कि ऐसे समय में नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाते हैं, जिससे सही निर्णय लेने में कठिनाई आती है। ऐसे में भक्त माँ बगलामुखी की शरण लेते हैं, जिन्हें शत्रु बुद्धि विनाशिनी, गलत सोच और हानिकारक इरादों को रोकने वाली देवी माना जाता हैं।
🔱 श्री पीतांबरा पीठ में माँ बगलामुखी का हवन पूरे विधि-विधान और सच्चे संकल्प के साथ किया जाता है। इस पूजा का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि नकारात्मकता को शांत करना, विरोध की शक्ति को कमजोर करना और भय या दबाव से घिरी परिस्थितियों में स्पष्टता लाना है। मान्यता है कि इस पीठ से की गई प्रार्थना माँ बगलामुखी तक विशेष प्रभाव के साथ पहुँचती है, खासकर तब जब भक्त न्याय, सुरक्षा और आत्मबल की कामना करता है।
🔱 श्री मंदिर के माध्यम से की जाने वाली यह विशेष पूजा इस विश्वास के साथ संपन्न की जाती है कि माँ बगलामुखी के इस जाग्रत स्थान से प्राप्त आशीर्वाद, कठिन कानूनी और विरोधी परिस्थितियों में शांति, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है।