🔥ज्योतिष शास्त्र में कुछ ग्रह योग ऐसे माने गए हैं जो जीवन में तीव्र उतार-चढ़ाव और अस्थिरता ला सकते हैं। अंगारक योग उन्हीं में से एक शक्तिशाली और उग्र योग माना जाता है। जब यह योग सक्रिय होता है, तब अचानक क्रोध बढ़ना, बिना सोचे निर्णय लेना, विवाद बढ़ना, दुर्घटना की आशंका और कानूनी उलझनों जैसी स्थितियाँ बनने लगती हैं। छोटी-सी बात भी बड़ा रूप ले सकती है और भावनाओं पर नियंत्रण न होने से लंबे समय तक परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।
🔥इस समय राहु कुंभ राशि में स्थित है और मंगल का उसी राशि में गोचर होने से अंगारक महायोग बन रहा है। राहु को धुआँ और भ्रम की शक्ति तथा मंगल को अग्नि और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। जब ये दोनों एक साथ आते हैं तो इनकी संयुक्त ऊर्जा बहुत तीव्र हो जाती है। इसलिए बिना आध्यात्मिक उपाय के यह योग जीवन में अचानक हानि, झगड़े, जोखिम भरे निर्णय या कानूनी फँसाव जैसी परिस्थितियाँ पैदा कर सकता है।
🔥 राहु-मंगल का यह योग तीव्र क्यों माना जाता है
वैदिक ज्योतिष में मंगल को साहस, कर्मशक्ति, रक्त और क्रिया का ग्रह माना जाता है, जबकि राहु अचानक घटनाओं, भ्रम और छिपी हुई शक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों के मिलन से मन की शांति प्रभावित हो सकती है और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। इस विशेष अनुष्ठान का उद्देश्य है –
• अचानक होने वाली दुर्घटनाओं से सुरक्षा की प्रार्थना
• विवाद और कानूनी उलझनों से राहत की भावना
• छिपे शत्रुओं और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा
• क्रोध पर नियंत्रण और मानसिक संतुलन
🔥 शक्तिशाली ग्रह मंदिरों में किया जाने वाला उपाय
अंगारक योग की शांति के लिए 18,000 राहु मूल मंत्र जाप उत्तराखंड के पावन राहु पैठाणी मंदिर में किया जाएगा, जो राहु शांति और छिपे शत्रुओं से रक्षा के लिए प्रसिद्ध है।
साथ ही 7,000 मंगल मूल मंत्र जाप उज्जैन स्थित मंगलनाथ महादेव मंदिर में किया जाएगा, जिसे मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है और जहाँ मंगल दोष शांति के उपाय अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं।
इन दोनों दिव्य ऊर्जा केंद्रों में किए जाने वाले मंत्र जाप से राहु-मंगल की उग्रता को शांत करने और जीवन में सुरक्षा, संतुलन और स्थिरता की प्रार्थना की जाती है।
श्री मंदिर के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम और संकल्प से इस विशेष राहु-मंगल शांति अनुष्ठान में जुड़ सकते हैं। विद्वान पुरोहित विधि-विधान से यह पूजा संपन्न करेंगे।