🔱 क्या भ्रम और मानसिक बेचैनी इस हद तक बढ़ गई है कि जीवन में तरक्की का रास्ता धुंधला पड़ गया है?
कई बार इंसान पर्याप्त संसाधनों और सुविधाओं के बावजूद ऐसे अनचाहे भ्रम और बेचैनी के चंगुल में फंस जाता है कि लाख प्रयासों के बावजूद सफलता दूर दिखने लगती है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, बेचैनी और मानसिक अशांति इतनी बढ़ जाती है कि मंजिल तक पहुंचना असंभव सा लगने लगता है। यदि आप ऐसी ही परिस्थिति के शिकार हो रहे हैं तो इसका मुख्य कारण आपके जीवन में गुरु की कृपा और आशीर्वाद की कमी हो सकती है।
इसी कमी को पूरा करने के लिए इस गुरु पूर्णिमा के दिन काशी के दो प्राचीन मंदिरों में गुरु और असीम ज्ञान के स्वरूप भगवान दक्षिणामूर्ति शिव को समर्पिक विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। यह अनुष्ठान आराधक के जीवन में शांति, शक्ति और समृद्धि का संचार कर सकता है। दक्षिणामूर्ति शिव की महिमा का वर्णन शास्त्रों में विस्तार से किया गया है, जो ज्ञान, शिक्षा और विद्या का भंडार हैं। जिनकी
शरण में जाने से आराधक को जीवन में बिना रुकावट आगे बढ़ने का दिव्य आशीर्वाद मिलता है।
🔱 दक्षिणामूर्ति शिव की कथा में छिपा है इस अभिषेक एवं विद्या प्राप्ति यज्ञ का महत्व:
हिंदू धर्म के पौराणिक ग्रंथों में चार ऋषियों की कथा आती है, जो बच्चों के रूप में ब्रह्मांड में विचरण करते हैं। उन्हें सनक, सनंदन, सनातन और सनतकुमार के नाम से जाना गया है। इस कथा के अनुसार, ये चार ऋषि ब्रह्मा जी से उनके मानस पुत्रों के रूप में प्रकट हुए थे। सृष्टि के विकास और निर्माण से ज्यादा ये ऋषि सर्वोच्च ज्ञान की खोज में रहते थे, जिससे उनकी चर्चा चारों तरफ फैलने लगी। ज्ञान को लेकर उनकी रुचि और उत्साह से प्रसन्न भगवान शिव ने उनका मार्गदर्शन किया और इसके लिए उन्होंने दक्षिणामूर्ति का रूप धारण किया। आदियोगी के इस दक्षिणामुखी रूप को शास्त्रों में आदि गुरु या पहला गुरु भी कहा गया है। भगवान शिव का यह रूप एक दयालु शिक्षक जैसा है, जो मोक्ष चाहने वालों को सही मार्ग प्रदान करते हैं।
श्री मंदिर के माध्यम से आप भी दक्षिणामूर्ति शिव अभिषेक एवं विद्या प्राप्ति यज्ञ में भाग ले सकते हैं। यह विशेष पूजा आराधक को भ्रमों से बचाते हुए मजबूत आत्मबल और बेचैनी पर काबू पाने का आशीष देती है।