🙏पवित्र महाकुंभ शाही स्नान का क्या है महत्व?🌟🕉️💫
सनातन धर्म में महाकुंभ पर्व का विशेष महत्व है, जो हर 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होता है। वहीं, हिंदू धर्म में प्रयागराज को तीर्थराज कहा जाता है, क्योंकि यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का संगम है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। जब बृहस्पति वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होता है, तो प्रयागराज में महाकुंभ मेला आयोजित किया जाता है। 2025 में यह संरेखण हो रहा है इसलिए इस बार प्रयागराज में महाकुंभ मेला आयोजित होगा। शाही स्नान कुंभ मेले का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इस बार महाकुंभ में कुल 6 शाही स्नान होंगे, जिसमें अंतिम शाही स्नान महाशिवरात्रि के पावन दिन पर होगा।
महाशिवरात्रि शाही स्नान पर पितृ पूजा करना कितना प्रभावशाली है?
हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि, भगवान शिव को समर्पित सबसे अहम दिन है, लेकिन इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ पितरों की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितर प्रसन्न होते हैं। इसलिए इस पावन दिन पर पितृ दोष शांति महापूजा करने से दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है। हिंदु धर्मग्रंथों के अनुसार, 'पितृ दोष' पूर्वजों की अधूरी इच्छाओं और नकारात्मक कर्मों के कारण होता है। इस दोष से पीड़ित जातक को आर्थिक परेशानियां, रिश्तों में तनाव एवं विवाद और स्वास्थ्य संबधी समस्याओं का सामना करना पडता है। वहीं, कहते हैं कि यदि यह पूजा तीर्थ स्थल पर की जाए तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसे में तीर्थस्थलों का राजा कहे जाने वाले शहर प्रयागराज में त्रिवेणी संगम का विशेष महत्व है। पदम पुराण के अनुसार, जो भी व्यक्ति त्रिवेणी संगम पर पितरों के लिए पूजा करता है, उसके पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए महाकुंभ महाशिवरात्रि के दिन अंतिम शाही स्नान पर त्रिवेणी संगम में पितृ दोष शांति महापूजा के साथ त्रिवेणी संगम गंगा आरती का आयोजन किया जा रहा है। श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लें और पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवारिक विवादों से मुक्ति का आशीष प्राप्त करें।