🔱 सनातन परंपरा में 92,000 शनि विशेष मंत्रों का जाप बहुत प्रभावशाली और विशेष साधना माना जाता है। यह जाप खासतौर पर शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैया, कुंडली में शनि की अशुभ स्थिति, बार-बार आने वाली रुकावटें, आर्थिक संकट, मानसिक तनाव और कर्मों से जुड़ी परेशानियों को शांत करने के लिए किया जाता है। कलियुग में इसके प्रभाव को चार गुना करने के लिए विद्वान पंडित 23,000 शनि मंत्रों का जाप चार बार, यानी कुल 92,000 मंत्रों का उच्चारण करते हैं। मान्यता है कि ये विशेष शनि मंत्र साधारण मंत्रों की तुलना में जल्दी प्रभाव दिखाते हैं, क्योंकि इनमें बीज मंत्र, ऊर्जा तत्व और विधि के अनुसार की जाने वाली प्रक्रिया शामिल होती है।
🔱 इस अनुष्ठान में पूरे 92,000 मंत्रों का जाप विधि-विधान से किया जाता है, ताकि भक्तों को शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त हो सके। मंत्र जाप के साथ-साथ शनि देव का अभिषेक, दीप अर्पण, तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र और दान का भी विशेष महत्व होता है। यह साधना जीवन में स्थिरता, अनुशासन, धैर्य और न्याय की भावना को मजबूत करने वाली मानी जाती है। श्रद्धा और नियमितता से किया गया यह जाप शनि के अशुभ प्रभाव को शांत कर शुभ फल देने वाला माना जाता है।
🔱 हिंदू धर्म में शनि देव तिल तेल अभिषेक को शनि देव को खुश करने का बहुत प्रभावी और प्राचीन उपाय माना गया है। शनि देव को कर्म, न्याय, अनुशासन और फल देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। जब कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो या साढ़ेसाती, ढैया, रुकावटें, आर्थिक संकट, बीमारी, मानसिक तनाव या काम में देरी जैसी स्थितियाँ सामने आएँ, तब तिल के तेल से किया गया अभिषेक विशेष लाभ देता है।
🔱इस शनिवार उज्जैन के प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में विद्वान पंडितों द्वारा शुद्ध काले तिल के तेल से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि अभिषेक के समय बड़े स्तर पर मंत्र जाप करने से उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। तिल का तेल शनि देव को प्रिय माना जाता है, क्योंकि यह उनके सादगी और अनुशासित स्वभाव का प्रतीक है।
📿 श्री मंदिर द्वारा आयोजित यह अनुष्ठान जीवन में स्थिरता, धैर्य, अंदरूनी शक्ति और सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस महापूजा के माध्यम से जीवन की चुनौतियाँ और कठिनाइयाँ धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।