जीवन में कभी-कभी ऐसा समय आता है जब पूरी ईमानदारी और लगातार मेहनत के बावजूद आगे बढ़ने का रास्ता खुलता ही नहीं है। आपके काम की सराहना नहीं होती, ऑफिस में बिना कारण तनाव बढ़ जाता है और व्यापार में सही योजना होने के बाद भी पैसा अटक जाता है या देरी से मिलता है। धीरे-धीरे मन में चिंता, आत्मविश्वास की कमी और थकान बढ़ने लगती है। बाहर से सब ठीक दिखाई देता है, लेकिन कोई भी काम आसानी से आगे नहीं बढ़ता।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बार-बार आने वाली नौकरी और धन से जुड़ी रुकावटें कई बार शनि दोष या शनि की साढ़े साती के प्रभाव से जुड़ी होती हैं। जब ऐसे समय में चंद्र ग्रहण पड़ता है, तो मानसिक और भावनात्मक दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि हमारे शास्त्रों के अनुसार, उपाय और प्रार्थना के लिए ग्रहण का समय अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। इस समय की गई प्रार्थना कई गुना फल देती है और ग्रहों तक सीधा प्रभाव पहुंचाने में मदद करती है।
धर्म ग्रंथों में राजा दशरथ से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा मिलती है। एक बार उन्हें ज्ञात हुआ कि शनि देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने वाले हैं, जिससे राज्य में भारी कठिनाई आ सकती है। लेकिन उन्होंने डरने के बजाय भक्ति का मार्ग चुना और श्रद्धा से “दशरथ कृत शनि स्तोत्र” की रचना की। उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर श्री शनि देव ने आशीर्वाद दिया कि जो भी इस स्तोत्र का श्रद्धा से पाठ करेगा, उसे अनावश्यक कष्टों से रक्षा मिलेगी।फाल्गुन पूर्णिमा की पावन रात्रि में किया जाने वाला यह महा अनुष्ठान उसी दिव्य वचन से जुड़ा है।
ऐसा माना जाता है कि 92,000 शनि मूल मंत्रों का जाप एक पवित्र अग्नि की भांति कार्य करता है जो करियर में रुकावट, कार्यस्थल के विवाद और बार-बार असफलता जैसी बाधाओं को शांत करता है। इस विशेष पूजा में विद्वान आचार्य चंद्र ग्रहण के सटीक समय पर 1,111 बार दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करते हैं, जिससे शनि की भारी ऊर्जा को स्थिरता और न्याय की शक्ति में बदला जा सके। काले तिल, तेल और नीले पुष्प अर्पित कर नौकरी और व्यापार में सम्मान, स्थिरता और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।
जैसे ग्रहण के बाद चंद्रमा फिर से स्वच्छ और उज्ज्वल दिखाई देता है, वैसे ही प्रार्थना है कि आपके व्यापार और करियर की रुकावटें भी धीरे-धीरे दूर हों। आय के नए मार्ग खुलें, रुका हुआ धन प्राप्त हो और आपको लंबे समय से प्रतीक्षित परिणाम मिलने लगें। यह पवित्र पूजा जीवन में संतुलन, शांति और न्याय स्थापित करने के उद्देश्य से की जाती है, ताकि आपकी सच्ची मेहनत को उसका उचित फल मिल सके।
श्री मंदिर के माध्यम से किया जाने वाला यह विशेष अनुष्ठान सफलता, स्थिरता और निरंतर पेशेवर उन्नति के लिए दिव्य आशीर्वाद प्रदान करने का माध्यम है।