सनातन परंपरा में दुर्गा सप्तशती को माँ भगवती को समर्पित सबसे शक्तिशाली ग्रंथों में से एक माना जाता है। इसमें कुल 13 पवित्र अध्याय और 700 श्लोक हैं, जिनमें देवी की दिव्य शक्ति और नकारात्मक शक्तियों पर उनकी विजय का वर्णन मिलता है। इन अध्यायों में बताया गया है कि माँ दुर्गा किस प्रकार संसार की रक्षा करती हैं, बुराई का नाश करती हैं और अपने भक्तों को साहस, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद देती हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, नकारात्मकता कम होती है और जीवन में देवी की शक्ति जागृत होती है।
इसी पवित्र भावना के साथ 9 दिन अखंड 9 शक्तिपीठ गंध अभिषेक और 13 अध्याय दुर्गा सप्तशती पाठ-पूजा का आयोजन किया जा रहा है। यह पूजा भारत के नौ पवित्र शक्तिपीठों में संपन्न होगी। इस विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान के माध्यम से माँ दुर्गा की दिव्य शक्ति का आह्वान किया जाएगा और भक्तों को कई शक्तिपीठों की संयुक्त कृपा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इन नौ दिनों तक लगातार अलग-अलग नौ शक्तिपीठों में माँ भगवती का गंध अभिषेक किया जाएगा। गंध अभिषेक में रोली और कुमकुम से बना पवित्र लेप देवी के स्वरूप पर अर्पित किया जाता है। देवी की उपासना में गंध का विशेष महत्व माना जाता है और यह माँ भगवती को अत्यंत प्रिय है। जब इस गंध को अभिषेक के रूप में अर्पित किया जाता है, तो यह भक्त की श्रद्धा, पवित्रता और भक्ति का प्रतीक बनता है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। दरअसल यह गंध वही लाल तिलक है जो परंपरागत रूप से माँ दुर्गा को अर्पित किया जाता है और उनकी शक्ति तथा रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
गंध अभिषेक के साथ-साथ नौ दिनों तक प्रतिदिन 13 अध्याय दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया जाएगा। हर दिन यह पाठ एक अलग शक्तिपीठ में होगा। जब दुर्गा सप्तशती का पाठ शक्तिपीठ जैसे पवित्र स्थानों पर किया जाता है, तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे भक्त के जीवन में देवी की कृपा से सुरक्षा, सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद का एक शक्तिशाली घेरा बनता है।
जिन नौ पवित्र शक्तिपीठों में यह पूजा की जाएगी, वे हैं-
• कालीघाट शक्तिपीठ
• ललिता माता शक्तिपीठ
• माँ तारापीठ शक्तिपीठ
• माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ
• महालक्ष्मी अंबाबाई शक्तिपीठ
• उमा कात्यायनी शक्तिपीठ
• भद्रकाली शक्तिपीठ
• त्रिपुरा सुंदरी शक्तिपीठ
• मंगला गौरी शक्तिपीठ
इन सभी शक्तिपीठों को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। वहीं एक ही अनुष्ठान में इन नौ शक्तिपीठों में पूजा का आयोजन होना बहुत दुर्लभ और अत्यंत शुभ माना जाता है।
आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस पवित्र नौ दिवसीय अनुष्ठान में अपना संकल्प जोड़ सकते हैं और माँ दुर्गा से जीवन की रक्षा, नकारात्मकता और बाधाओं से मुक्ति, कार्यों में सफलता और अपने जीवन के चारों ओर देवी का दिव्य सुरक्षा कवच प्राप्त करने की प्रार्थना कर सकते हैं।