🌑 गुप्त नवरात्रि, साधना, तंत्रोक्त पूजन और आत्मिक जागरण का अत्यंत रहस्यमयी लेकिन शक्तिशाली पर्व है। यह नवरात्रि विशेष रूप से साधकों के लिए मानी जाती है, जहां बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि आंतरिक तप, मौन और साधना को महत्व दिया जाता है। इस काल में 10 महाविद्याओं - मां काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की विधिवत पूजा की जाती है। प्रत्येक महाविद्या चेतना के एक विशिष्ट स्वरूप और शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। गुप्त नवरात्रि में किए गए 9 दिवसीय अखंड दस महाविद्या तंत्रोक्त पूजन और महायज्ञ से जीवन में नजर दोष शांत होने की मान्यता है। इस बार यह अनुष्ठान हरिद्वार स्थित मां बगलामुखी सिद्धपीठ में होने जा रहा है, जो अपने आप में दिव्य अवसर है।
🌺 10 महाविद्याएं और उनकी महिमा
1. माँ काली
समय और मृत्यु पर विजय की शक्ति। भय, अज्ञान और अहंकार का नाश करती हैं।
2. माँ तारा
संकटों से उद्धार करने वाली देवी हैं। साधक को मार्गदर्शन, वाणी और ज्ञान प्रदान करती हैं।
3. माँ षोडशी (त्रिपुरसुंदरी)
सौंदर्य, आनंद और पूर्णता की देवी हैं। भोग और मोक्ष का संतुलन सिखाती हैं।
4. माँ भुवनेश्वरी
संपूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री हैं। जीवन में स्थिरता और विस्तार प्रदान करती हैं।
5. माँ छिन्नमस्ता
त्याग और आत्मबलिदान की प्रतीक हैं। अहंकार का छेदन कर जागृति देती हैं।
6. माँ भैरवी
तप, अनुशासन और तेज की देवी हैं। साधना में दृढ़ता प्रदान करती हैं।
7. माँ धूमावती
वैराग्य और यथार्थ का बोध कराती हैं। मोह और भ्रम से मुक्त करती हैं।
8. माँ बगलामुखी
शत्रु और नकारात्मक शक्तियों का स्तंभन हैं। विजय और संरक्षण प्रदान करती हैं।
9. माँ मातंगी
वाणी, कला और ज्ञान की अधिष्ठात्री हैं। साधक को दिव्य अभिव्यक्ति देती हैं।
10. माँ कमला
समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी हैं। धर्मपूर्ण धन और स्थायी सुख प्रदान करती हैं।
🌺 10 महाविद्याएं मानव शरीर के सूक्ष्म चक्र तंत्र से गहराई से जुड़ी हुई हैं और साधक की आंतरिक चेतना को जाग्रत करती हैं। माँ काली मूलाधार में स्थित भय और जड़ता को नष्ट करती हैं, तारा स्वाधिष्ठान में प्रवाहित प्राणशक्ति को दिशा देती हैं, षोडशी मणिपुर में तेज और आत्मविश्वास जाग्रत करती हैं, जबकि भुवनेश्वरी करुणा और विस्तार का भाव उत्पन्न करती हैं। छिन्नमस्ता विशुद्ध चक्र में त्याग और आत्मशुद्धि का बोध कराती हैं, भैरवी आज्ञा चक्र में तप और अनुशासन को स्थिर करती हैं। धूमावती सहस्रार की शून्यता और वैराग्य सिखाती हैं, मातंगी वाणी और अभिव्यक्ति को संतुलित करती हैं, तथा कमला समस्त चक्रों में समृद्धि और संतुलन स्थापित करती हैं। गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों में किया गया अखंड यज्ञ इन चक्रों को क्रमशः सक्रिय कर साधक को आंतरिक सुरक्षा, नजर दोष और नकारात्मकता से रक्षा का आशीर्वाद देने के लिए जाना जाता है।
✨ श्री मंदिर द्वारा मां बगलामुखी के दिव्य धाम में 9 दिवसीय अखंड दस महाविद्या तंत्रोक्त पूजन एवं महायज्ञ में भाग लें और नकारात्मक शक्तियों और बुरी नज़र से सुरक्षा का आशीर्वाद पाएं।