हिंदू धर्म में अमावस्या का बहुत महत्व है। हर महीने में एक अमावस्या आती है। जब यह शनिवार के दिन पड़ती है तो इसे शनि अमावस्या कहते हैं। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित होता है और इस दिन अनुराधा नक्षत्र भी होता है। यह नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से 17वां माना जाता है और इसका स्वामी शनि है। इस दिन शनि के अशुभ प्रभावों से राहत पाई जा सकती है। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है, जिसकी स्थिति किसी भी व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। जिनपर शनि देव की कृपा होती है, उनके जीवन में कठिनाइयाँ दूर होती हैं और सफलता प्राप्त होती है। लेकिन, यदि शनि प्रतिकूल स्थिति में हो, तो जीवन में कई बाधाएं व चुनौतियां आती हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में बताए गए मंत्र जाप का विशेष महत्व है। कहते हैं कि शनिदेव के मूल मंत्र जाप करने से जीवन में सभी प्रकार के कष्ट कम हो सकते हैं। शनि की महादशा 19 वर्षों तक चलती है और इस दौरान शनि के मूल मंत्र का 19,000 बार जाप करना अति लाभकारी माना गया है। इस जाप के साथ-साथ कालरात्रि कवच पाठ करना भी शुभ माना जाता है, जिससे कर्म दोषों का नाश होता है।
ज्योतिषियों के अनुसार, मां कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अर्थात शनिदेव के साथ मां कालरात्रि की पूजा करने से शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। इतना ही नहीं, देवी की कृपा से ग्रह बाधाएं भी समाप्त हो जाती हैं। मां कालरात्रि और शनिदेव के बीच एक संबंध भी है। ज्योतिष में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है और इसी तरह मां कालरात्रि गलत काम करने वालों को दंड देती हैं। इस दिन अनुराधा नक्षत्र भी पड़ रहा है, जिसका स्वामी स्वयं शनिदेव हैं, जिससे इस पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। इसलिए, शनिवार अमावस्या और अनुराधा नक्षत्र के शुभ संयोग में उज्जैन के श्री नवग्रह शनि मंदिर में 19,000 शनि मूल मंत्र जाप और कालरात्रि कवच पाठ का आयोजन किया जाएगा। श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लें और माँ कालरात्रि और भगवान शनि से नकारात्मकता से सुरक्षा और कर्म दोष से राहत के लिए आशीर्वाद प्राप्त करें।