😔शनि वक्री यानी शनि की उल्टी चाल के असर से बचने के लिए महादशा शांति महापूजा का अवसर
शनि वक्र जैसी ज्योतिषीय स्थिति में शनि शांति पूजा का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। शनि ग्रह की वक्र दृष्टि व्यक्ति के जीवन में रुकावटें, कठिनाइयां और संकट बढ़ने लगते हैं। व्यक्ति को मानसिक तनाव, असफलताएं और शारीरिक समस्याएं घेर लेती हैं। शनि वक्र को शांति देने के लिए शनि शांति पूजा बेहद फलदायी मानी गई है। पितृ पक्ष से पहले शनि पीड़ा शांति, शनि तिल-तेल अभिषेक और महादशा शांति महापूजा का यह दुर्लभ अवसर है।
📜 शनि साढ़े साती एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण काल है, जिसमें शनि ग्रह के बुरे असर से व्यक्ति के जीवन में मानसिक तनाव और बाधाएं बढ़ सकती हैं। यह अवधि सात साल तक रहती है और इसके प्रभाव से व्यक्ति को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस अनुष्ठान में तिल तेल अभिषेक शनि की शांति और साढ़े साती के प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है। यह अभिषेक विशेष रूप से शनि के दोषों को शांत करने के लिए बेहद फलदायी माना गया है, जिससे जीवन में समृद्धि और शांति की सही दिशा मिल सकती है।
🔔 नवग्रह शनि मंदिर में शनि महादशा शांति महापूजा का विशेष महत्व है। शनि महादशा व्यक्ति के जीवन में कठिनाई, विघ्न और संकट बढ़ा देती है, जो स्वास्थ्य और पारिवारिक रुकावटों के रूप में सामने आता है। इस अनुष्ठान में शनि ग्रह की विशेष पूजा की जाती है, ताकि उसके कष्टकारक प्रभावों को कम किया जा सके। अनुष्ठान के दौरान शनि के मंत्रों का जाप, तिल तेल अभिषेक और शनि देव को विशेष आहूतियाँ अर्पित की जाती हैं। यह महापूजा शनि के नकारात्मक प्रभावों से राहत दिलाने और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की सही दिशा दिखाने के लिए की जाती है।
📿उज्जैन का नवग्रह शनि मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहाँ शनि देव की पूजा शिवलिंग के रूप में होती है। यह मंदिर शनि शांति के साथ-साथ नवग्रहों की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। यह अनुष्ठान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पितृ पक्ष आने वाला है, जिसमें कई ऐसे अनुष्ठान हैं, जो शुभ नहीं माने जाते।
आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लेकर शनि के प्रभावों से राहत पा सकते हैं और जीवन में सुख, स्थिरता और सफलता की दिशा तय कर सकते हैं।