🌿 सनातन धर्म में जया एकादशी भगवान श्री विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी तिथि मानी गई है। वर्ष 2026 की शुरुआत इसी पुण्यदायी एकादशी से होना अपने आप में एक विशेष आध्यात्मिक संकेत माना जाता है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि जया एकादशी जीवन में चल रही असफलताओं, बाधाओं और नकारात्मक कर्मों पर विजय प्रदान करने वाली तिथि है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक की गई विष्णु उपासना से न केवल वर्तमान जीवन के दोष शांत होते हैं, बल्कि पिछले सात जन्मों के संचित पापों का क्षय भी संभव होता है।
🌿 जया एकादशी को विजय, पाप नाश और धर्म की पुनः स्थापना से जोड़ा गया है। पद्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, इस एकादशी का व्रत, पाठ और अनुष्ठान आत्मा को शुद्ध करता है और व्यक्ति को कर्म बंधनों से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ाता है। वर्ष के प्रारंभ में भगवान श्री विष्णु की शरण में जाना आने वाले पूरे वर्ष के लिए सुरक्षा, स्थिरता और शुभता का आधार माना जाता है। 11 बार विष्णु सहस्रनाम पाठ मानसिक अशांति, कर्म दोष और पूर्व जन्मों की बाधाओं को शांत करने में सहायक माना गया है, जिससे जीवन में सफलता और संतुलन की अनुभूति होती है।
🌿 शास्त्रों में विष्णु सहस्रनाम को भगवान श्री विष्णु के अनंत स्वरूप, करुणा और पाप नाशक शक्ति का प्रतीक बताया गया है। जया एकादशी पर 11 बार विष्णु सहस्रनाम पाठ विशेष फलदायी माना गया है। इसी पावन अवसर पर तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित प्राचीन एट्टेलुथुपेरुमाल मंदिर में पाप क्षय महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। यह मंदिर कर्म शुद्धि और विष्णु कृपा के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। महायज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन कुंड में पवित्र आहुतियाँ और तुलसी आधारित अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। मान्यता है कि इस महायज्ञ से सात जन्मों तक फैले पाप संस्कारों का क्षय, पितरों का आशीर्वाद और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष के मार्ग सुदृढ़ होते हैं।
🌿 श्री मंदिर के माध्यम से जया एकादशी पर आयोजित इस 11 विष्णु सहस्रनाम पाठ और पाप क्षय महायज्ञ में सहभागी बनें और वर्ष 2026 की शुरुआत भगवान श्री विष्णु के आशीर्वाद के साथ करें।