🌸 फाल्गुन कृष्ण एकादशी, जिसे विजया एकादशी भी कहा जाता है, भगवान श्री विष्णु को समर्पित एक बहुत ही पवित्र तिथि मानी जाती है। हमारी सनातान परंपरा में ऐसी मान्यता है कि यह एकादशी विशेष रूप से आत्मचिंतन, भक्ति और मन को शांति की ओर ले जाने का अवसर देती है। एकादशी का व्रत केवल खान पान से जुड़ा नियम नहीं, बल्कि विचारों की सफाई और भीतर की सजगता से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि कुछ एकादशियाँ विशेष आध्यात्मिक महत्व रखने वाली मानी जाती हैं, और विजया एकादशी को भी उसी भाव से देखा जाता है। इसे 7 पिछले जन्मों के पाप नाशक विशेष एकादशी के रूप में भी जाना जाता है।
ऐसी धारणा है कि इस दिन श्रद्धा से भगवान विष्णु का स्मरण, व्रत और पाठ करने से संचित कर्मों के बोझ को समझने और उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने की भावना जागती है। यह तिथि साधक को आत्ममंथन करने और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाने की प्रेरणा देती है। इसी अवसर पर “7 पिछले जन्मों के पाप नाशक विशेष 11 विष्णु सहस्रनाम पाठ पाप क्षय महायज्ञ” जैसे विशेष अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। विष्णु सहस्रनाम के 11 बार पाठ को भगवान विष्णु की करुणा, संरक्षण और पालन शक्ति का स्मरण करने का माध्यम माना जाता है। उनके हजार नामों का उच्चारण भक्ति को गहरा करने और मन को शांत करने में सहायक माना जाता है।
इसके साथ किया जाने वाला पाप क्षय महायज्ञ वैदिक परंपरा से जुड़ा एक हवन अनुष्ठान है, जिसमें मंत्रों और आहुतियों के माध्यम से नकारात्मक कर्मों से राहत की प्रार्थना की जाती है। कहते हैं कि इस तरह के अनुष्ठान साधक को अपने भीतर सुधार, पश्चाताप और सकारात्मक संकल्प की ओर प्रेरित करते हैं। यह खास एकादशी उन लोगों के लिए विशेष मानी जाती है जो अपने जीवन में आध्यात्मिक शुद्धि, मानसिक हल्केपन और पुराने कर्मों से सीख लेकर आगे बढ़ने का भाव रखते हैं।
इस विशेष एकादशी पर श्री मंदिर द्वारा आयोजित 11 विष्णु सहस्रनाम पाठ और पाप क्षय महायज्ञ का यह पावन अवसर न चूकें। भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें और जीवन में सफलता, पवित्रता और पूर्णता का स्वागत करें।