इस पूर्णिमा पर प्राप्त करें माँ बगलामुखी, काल भैरव और हनुमान जी की त्रिस्तरीय शक्ति का दिव्य आशीर्वाद
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। यह दिन आत्मशुद्धि, शत्रुओं से मुक्ति और मानसिक शांति के लिए किए गए अनुष्ठानों के लिए बेहद शुभ होता है। खासकर आषाढ़ माह की पूर्णिमा, शक्ति संचय और विजय प्राप्ति के लिए तांत्रिक और वैदिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन माँ बगलामुखी, भगवान काल भैरव और श्री हनुमान जी की आराधना करने से जीवन की कठिन बाधाएँ दूर होती हैं और आत्मबल, साहस और सुरक्षा की अनुभूति होती है। माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिन्हें शत्रुनाश और विजय की देवी माना गया है। मान्यता है कि श्रीराम और पांडवों ने भी अपने जीवन के कठिन समय में माँ बगलामुखी का आशीर्वाद प्राप्त किया था। इनकी पूजा से वाद-विवाद में सफलता, बाधाओं से मुक्ति और शत्रु पर विजय मिलती है।
भगवान काल भैरव को शिवजी का रौद्र और रक्षक रूप माना जाता है। ‘भैरव’ का अर्थ है- जो भय का नाश करते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा पर इनकी पूजा से भय, भ्रम और अदृश्य बाधाएँ दूर होती हैं। काल भैरव साधना जीवन में नियंत्रण, साहस और आत्मरक्षा की भावना को मजबूत करती है। वहीं हनुमान जी, जिन्हें संकट मोचक और शक्ति, भक्ति और रक्षा का प्रतीक माना जाता है, इस दिन विशेष रूप से पूजनीय होते हैं। वे शिवजी के ही अंशावतार हैं और रामायण में उनके साहसिक कार्य, जैसे लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाना और कालनेमि वध, इस बात के प्रतीक हैं कि वे हर संकट में अपने प्रियजनों और भक्तों की रक्षा करते हैं।
आषाढ़ पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर श्री मंदिर द्वारा माँ बगलामुखी, भगवान काल भैरव और हनुमान जी की त्रिस्तरीय शक्ति वर्धक पूजा और यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मंत्र जाप, यज्ञ और विशेष पूजा विधियाँ शामिल हैं, जो भक्तों को मानसिक शांति, शत्रुनाश और आत्मबल प्राप्त करने में सहायता करती हैं। आप भी इस दिव्य अनुष्ठान में सहभागी बनें और तीनों देवताओं की कृपा से जीवन में विजय, स्थिरता और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करें।