गुप्त नवरात्रि की अष्टमी पर प्राप्त करें माँ बगलामुखी, काल भैरव और हनुमान जी की त्रिस्तरीय शक्ति का दिव्य आशीर्वाद
गुप्त नवरात्रि की अष्टमी, शक्ति और सुरक्षा की विशेष साधना का दिन माना जाता है। यह तिथि उन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है जो जीवन में आत्मबल, साहस और अदृश्य संकटों से मुक्ति की कामना रखते हैं। इस दिन देवी के उग्र और रक्षक स्वरूपों का आह्वान कर नकारात्मक ऊर्जा, भय और बाधाओं से रक्षा की याचना की जाती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि माँ बगलामुखी, भगवान काल भैरव और संकटमोचन हनुमान की संयुक्त आराधना से जीवन की अनेक जटिलताएँ सरल हो जाती हैं। माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिन्हें शत्रुनाश, वाणी सिद्धि और विजय की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मान्यता है कि श्रीराम और पांडवों ने भी जीवन के संकटकाल में इनकी आराधना कर दिव्य मार्गदर्शन प्राप्त किया था।
वहीं भगवान काल भैरव, शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप हैं, जिनकी पूजा से जीवन की अनिश्चितताएँ, भय और अदृश्य बाधाएँ दूर होती हैं। काल भैरव की साधना आत्मरक्षा, मानसिक स्पष्टता और नियंत्रण की भावना को सुदृढ़ करती है। हनुमान जी, जिन्हें संकटमोचक कहा जाता है, शक्ति, भक्ति और रक्षा के प्रतीक हैं। वे शिव के ही अंशावतार माने जाते हैं, और रामायण में उनके साहसिक कार्यों से यह सिद्ध होता है कि वे हर संकट में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। उनका स्मरण संकटों से उबरने और जीवन में गति लाने के लिए अत्यंत फलदायी होता है। इन्हीं दिव्य शक्तियों के आह्वान के लिए गुप्त नवरात्रि की अष्टमी के पावन अवसर पर श्री मंदिर द्वारा माँ बगलामुखी, काल भैरव और हनुमान जी की त्रिस्तरीय शक्ति वर्धक पूजा और यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
आप भी इस दिव्य साधना में सहभागी बनें और तीनों देवताओं की कृपा से जीवन में विजय, स्थिरता और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करें।