🔱 इस सावन कालाष्टमी पर जुड़ें काशी से होने वाली 4 प्रहर काल भैरव पूजा में और पाएं अदृश्य संकटों से दिव्य रक्षा का आशीर्वाद! 🕉️
सावन का महीना शिवभक्तों के लिए भक्ति, साधना और आत्मिक शांति का एक खास समय माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस पवित्र महीने में भगवान शिव अपने भक्तों के और भी करीब होते हैं और उनकी पूजा विशेष फल देने वाली होती है। इस माह में आने वाली कालाष्टमी तिथि को भी बहुत शुभ माना गया है, क्योंकि यह भगवान शिव के रक्षक और उग्र रूप भगवान काल भैरव की पूजा का दिन होता है। कहते हैं कि इस दिन काल भैरव की पूजा करने से जीवन में छिपे डर, नकारात्मक सोच और परेशानियों से राहत मिलने का रास्ता बन सकता है।
पुराणों में कथा मिलती है कि एक बार ब्रह्मा जी के अहंकार को शांत करने के लिए भगवान शिव ने काल भैरव रूप धारण किया और ब्रह्मा का एक सिर काट दिया। यह कार्य अहंकार के विनाश और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना गया। इस घटना के बाद भगवान भैरव ने ब्रह्मा हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए भिक्षा ली और घूमते-घूमते अंत में काशी पहुंचे, जहां उन्हें शांति मिली। तभी से उन्हें काशी का रक्षक यानी ‘कोतवाल’ माना जाता है, जो वहां आने वाले हर भक्त की देखभाल करते हैं।
इसी दिव्य काशी नगरी में सावन की कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव को समर्पित चार प्रहर काल भैरव अभिषेक पूजा, श्रृंगार सेवा, खप्पर सेवा और भोग सेवा का आयोजन किया जा रहा है। जैसे की अनुष्ठान के नाम में ही इस बात का वर्णन है कि यह पूजा चार प्रहरों में की जाने वाली है। यानि यह पूजा दिन के चार भागों में की जाती है और हर प्रहर में भैरव जी की एक खास सेवा होती है:
1. श्रृंगार सेवा – भगवान को सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं।
2. खप्पर सेवा – उनके तप और त्याग के प्रतीक रूप में खप्पर अर्पित किया जाता है।
3. भोग सेवा – उन्हें भोग अर्पण कर कृपा की प्रार्थना की जाती है।
यह पूजा काशी के आदि काल भैरव मंदिर में श्री मंदिर द्वारा आयोजित की जा रही है। यदि आप भी जीवन में सुरक्षा, शांति और आत्मबल की खोज में हैं, तो इस सावन कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की इस विशेष पूजा में जुड़कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।