☀️ शास्त्रों के अनुसार रथ सप्तमी, जिसे सूर्य जयंती भी कहा जाता है, वह विशेष दिन माना जाता है जब भगवान सूर्य अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर उत्तर दिशा की यात्रा शुरू करते हैं। यह दिन प्रकाश, ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन सूर्य की पूजा करने से मन और जीवन में फैला अंधकार कम होता है और भीतर स्पष्टता व आत्मबल का अनुभव होता है। इसी कारण रथ सप्तमी को नए समय की शुरुआत से जोड़ा जाता है।
🌞 इसी भावना के साथ, सनातन धर्म में नए साल की शुरुआत को भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। माना जाता है कि साल के आरंभ में किया गया संकल्प और पूजा पूरे वर्ष की दिशा तय करता है। इस समय की गई साधना से मन शांत होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर पाता है। जब रथ सप्तमी रविवार के दिन आती है, तो यह सूर्य तत्व को और अधिक प्रभावी बना देती है, क्योंकि रविवार भगवान सूर्य को समर्पित होता है। इसलिए यह दिन नेतृत्व, प्रशासन और सार्वजनिक जिम्मेदारियों की तैयारी करने वालों के लिए विशेष माना जाता है।
🌞 खास बात यह है कि वर्ष 2026 को सूर्य के प्रभाव वाला वर्ष माना जा रहा है। ऐसे में इसके आरंभ में सूर्य उपासना करना विशेष फलदायी समझा जाता है। भगवान सूर्य को अधिकार, अनुशासन, प्रतिष्ठा और आत्मबल का स्रोत माना गया है। उनकी कृपा की कामना वे लोग करते हैं जो सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, प्रशासनिक सेवाओं, राजनीति या ऐसे कार्यक्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हों जहाँ नेतृत्व और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है।
📜 वेदों में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है, यानी ईश्वर का वह रूप जो प्रतिदिन दिखाई देता है। वे समय, कर्म और कर्तव्य से जुड़े माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जब सूर्य की ऊर्जा संतुलित होती है, तो व्यक्ति के विचार साफ होते हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है और अपने कार्यों के लिए पहचान मिलने लगती है। इससे जीवन में अनुशासन और स्थिरता आती है।
🕉️ इसी संतुलन को पाने के लिए, मंत्र साधना के माध्यम से सूर्य की कृपा का आह्वान किया जाता है। सूर्य गायत्री मंत्र को मन की स्पष्टता, आत्मबल और सही दिशा में कार्य करने से जोड़ा जाता है। इसके साथ आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ साहस और धैर्य बढ़ाने वाला माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन मंत्रों के जप से व्यक्ति कठिन समय में भी स्थिर रहकर सही निर्णय ले पाता है।
🔥 इन्हीं मान्यताओं के आधार पर, रविवार सूर्य वर्ष विशेष के अंतर्गत 51000 सूर्य गायत्री मंत्र जप और आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ किया जाएगा। इस साधना का उद्देश्य व्यक्ति के प्रयासों को सूर्य की ऊर्जा के साथ जोड़ना माना जाता है, ताकि आने वाला वर्ष आत्मविश्वास, संतुलन और जिम्मेदारियों के लिए मानसिक रूप से तैयार होकर शुरू किया जा सके।