🌞 जब भगवान श्री सूर्य देव उत्तर दिशा की ओर अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं, तब पूरे ब्रह्मांड में एक नई रोशनी फैल जाती है। मकर संक्रांति एक अत्यंत पावन दिन है, जो उत्तरायण की शुरुआत का संकेत देता है। उत्तरायण (मकर संक्रांति) को देवताओं का दिन कहा गया है। इस समय दिव्य ऊर्जा प्रबल होती है, अंधकार धीरे-धीरे कम होने लगता है और जीवन में प्रगति के साथ सकारात्मकता के मार्ग खुलने लगते हैं।
सनातन में इसे जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया है। जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो थके हुए मन को नई ऊर्जा मिलती है, रुके हुए प्रयास आगे बढ़ने लगते हैं और अटके हुए कर्म फिर से मजबूत होने शुरू हो जाते हैं। जो भक्त अन्याय, कानूनी परेशानियों, छिपे शत्रुओं या आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह समय विशेष सुरक्षा और मार्गदर्शन लेकर आया है।
सूर्यदेव एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिन्हें हम प्रतिदिन देख सकते हैं। वे प्रकाश, शक्ति, स्पष्टता और सत्य के स्रोत हैं। उत्तरायण की शुरुआत में सूर्य उपासना करने से स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और जीवन में उचित सफलता प्राप्त होती है। इस बढ़ती शक्ति की रक्षा के लिए मां बगलामुखी का आशीर्वाद लिया जाता है। वे ‘स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री’ हैं, जो नकारात्मक प्रभाव, झूठे आरोप और शत्रु बाधाओं को शांत करती हैं।
🌞 सूर्य देव की तेजस्वी शक्ति और मां बगलामुखी की दैवीय ऊर्जा मिलकर भक्तों को विजय की ओर मार्गदर्शन देती हैं।
इस दुर्लभ अवसर पर एक विशेष वैदिक अनुष्ठान किया जाता है:
🔸 51,000 सूर्य गायत्री मंत्र जाप – शक्ति, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सफलता के लिए
🔸 36,000 मां बगलामुखी मंत्र जाप – बाधा निवारण, शत्रु शांति और विवाद समाधान हेतु
🌞 यह अनुष्ठान जयपुर स्थित प्राचीन गलताजी सूर्य मंदिर में संपन्न होता है, जो सदियों से सूर्य उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। श्री मंदिर के माध्यम से आप भी अपना संकल्प अर्पित कर इस पावन अनुष्ठान से जुड़ सकते हैं। उत्तरायण सूर्य का प्रकाश आपके जीवन में न्याय, स्पष्टता और विजय लेकर आए, और मां बगलामुखी की कृपा से हर बाधा शांत हो, ऐसी कामना है!