सनातन धर्म में बड़ा मंगल भगवान हनुमान जी को समर्पित होता है, जिन्हें संकटमोचन कहा जाता है और जो अपने भक्तों के जीवन से भय, दुख और बाधाओं को दूर करने वाले माने जाते हैं। जब यह पवित्र दिन अधिक मास के साथ आता है, तब इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। यह समय साधना, प्रार्थना और गहरी आध्यात्मिक शांति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दुर्लभ संयोग पर 51 ब्राह्मणों द्वारा शनि–हनुमान महापूजा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भगवान हनुमान और शनि देव दोनों की कृपा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है जो जीवन में लगातार कठिनाइयों, ग्रह दोषों और लंबे समय से चल रही परेशानियों से राहत चाहते हैं।
शनि देव को कर्म और न्याय का देवता माना जाता है। उनकी दशा जैसे साढ़ेसाती या शनि दशा के दौरान जीवन में देरी, करियर में रुकावट, आर्थिक अस्थिरता और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। वहीं भगवान हनुमान को सर्वोच्च रक्षक माना जाता है, जिनकी भक्ति से भय कम होता है और शनि के प्रभाव भी शांत होते हैं।
इस महापूजा में 51 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा 5,100 हनुमान मूल मंत्र जाप, 5,100 संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ और 23,000 शनि मंत्र जाप किया जाएगा। इसके साथ शनि तिल तेल अभिषेक और हनुमान जी के विशेष अनुष्ठान भी किए जाएंगे। इन सभी क्रियाओं का उद्देश्य एक शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न करना है, जो नकारात्मकता को दूर कर जीवन में स्थिरता और संतुलन लाती है।
यह विशेष अनुष्ठान शनि साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने, करियर में आने वाली बाधाओं को दूर करने, भय और शत्रु समस्याओं से राहत दिलाने तथा नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता है। यह पूजा उज्जैन के मायापति हनुमान मंदिर और डबरा के नवग्रह मंदिर जैसे पवित्र स्थलों पर संपन्न होगी, जो अपनी प्राचीन परंपरा और दिव्य ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध हैं। 51 ब्राह्मणों द्वारा एक साथ किए जाने वाले वैदिक अनुष्ठान इस पूजा की शक्ति और प्रभाव को और अधिक बढ़ाते हैं।
जो लोग जीवन में बार-बार आने वाली परेशानियों, भय या शनि से जुड़ी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह बड़ा मंगल–अधिक मास का दुर्लभ अनुष्ठान एक विशेष अवसर है, जिससे वे दिव्य सुरक्षा, स्थिरता और शांति का अनुभव कर सकते हैं।