🛕 वैदिक ज्योतिष में काल सर्प दोष को राहु और केतु के संयुक्त प्रभाव से जोड़ा जाता है। जब कुंडली में यह दोष बनता है, तो जीवन में असंतुलन, बार-बार रुकावटें, भय, भ्रम और दिशा की कमी महसूस हो सकती है। काल सर्प दोष शांति पूजा एक पारंपरिक उपाय है, जो राहु–केतु की अशांत ऊर्जा को शांत कर जीवन में स्थिरता और स्पष्टता लाने के लिए की जाती है।
🛕 यह पूजा नासिक स्थित श्री त्र्यंबकेश्वर तीर्थ क्षेत्र में की जाती है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की ऊर्जा के साथ काल सर्प दोष निवारण पूजा के लिए यह सबसे शक्तिशाली स्थानों में से एक माना गया है। गोदावरी नदी के तट पर होने वाले इस अनुष्ठान की विद्वानों के बीच बड़ी मान्यता है।
इस पूजा के मुख्य चरण:
🌸 गणेश पूजा और नवग्रह शांति – सबसे पहले विघ्नों को दूर करने, ग्रहों में सामंजस्य लाने और प्रारंभिक मंत्र जाप व शुद्धिकरण द्वारा राहु-केतु के प्रभाव को शांत करने के लिए की जाती है।
🌸 रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप – भगवान शिव की मुख्य आराधना, जिसमें दूध और बिल्व पत्र से अभिषेक तथा शक्तिशाली मंत्रों का जाप किया जाता है। इससे स्वास्थ्य की रक्षा होती है, दोषों का प्रभाव कम होता है और शिव कृपा प्राप्त होती है।
🌸 नाग पूजा और हवन – घी, तिल और नाग प्रतिमाओं की आहुति के साथ अग्नि अनुष्ठान किया जाता है। यह कर्मबंधन के नाश का प्रतीक है और दूध से अभिषेक कर शांति की जाती है।
🌸 आरती और विसर्जन – अंत में आरती की जाती है और प्रतिमाओं का विसर्जन कर आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे स्थायी शांति बनी रहे।
🛕 यह पूजा अनुभवी मंदिर पुजारियों द्वारा पूर्ण वैदिक विधि से संपन्न की जाती है। सभी संकल्प, मंत्र और अर्पण भक्त के नाम और गोत्र से किए जाते हैं। आप घर से ही पूजा में भाग लेकर इसका पूरा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।