🪔 सुख-समृद्धि के लिए एकादशी पर भगवान सत्यनारायण की कथा और नवग्रह शांति पूजा
भगवान सत्यनारायण की कथा विष्णु जी के एक स्वरूप, सत्यनारायण जी की महिमा का वर्णन करती है। पद्म पुराण के अनुसार, इस कथा के श्रवण और पूजन से जीवन के पाप नष्ट होने लगते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कथा में कई प्रसंगों के माध्यम से बताया गया है कि कैसे भक्तिपूर्वक सत्यनारायण अनुष्ठान करने वालों के दुख दूर होते हैं और उन्हें सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति संभव है। यह कथा सामान्य गृहस्थ से लेकर व्यापारी, ब्राह्मण और राजा तक सभी के कल्याण की प्रेरणा देती है। पूर्ण श्रद्धा और आस्था से की गई यह पूजा भौतिक समृद्धि के द्वार खोल सकती है।
एट्टेलुथुपेरुमल मंदिर एक प्राचीन विष्णु मंदिर है, जो तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में स्थित है। इस एकादशी यहां सत्यनारायण कथा और नवग्रह शांति पूजा होने जा रही है। यह विष्णु मंदिर नवग्रह दोषों से राहत और जीवन में संतुलन प्राप्त करने के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा से यहां की गई नवग्रह शांति पूजा से राहु, केतु, शनि, मंगल और अन्य ग्रहों के दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। जब नौ ग्रहों को शांत किया जाता है तो भौतिक समृद्धि और कल्याण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
पितृ पक्ष से पहले एकादशी पर होने जा रही संपूर्ण नवग्रह शांति विष्णु पूजा का शास्त्रों में बड़ा महत्व है, क्योंकि यह पूजा भगवान विष्णु की कृपा और नौ ग्रहों की शांति, दोनों का आशीर्वाद प्रदान करती है। शास्त्रों के अनुसार, जब राहु, केतु, शनि, मंगल या अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभाव जीवन में बाधाएँ उत्पन्न करते हैं, तब यह पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है। भक्त भगवान विष्णु के सहस्रनाम, तुलसी अर्चना, दीप दान और हवन के माध्यम से ग्रहों की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। श्री मंदिर द्वारा आयोजित होने जा रहे इस अनुष्ठान से मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की दिशा मिलती है।
सत्यनारायण भगवान की असली कथा पद्म पुराण में मिलती है, जिसमें भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की महिमा का बखान विस्तार से किया गया है। कथा के अनुसार, जब कलियुग में लोग दुःख, गरीबी और कष्टों से घिर गए, तब स्वयं भगवान विष्णु ने नारद मुनि को यह अनुष्ठान बताया था। मान्यता है कि जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति से सत्यनारायण कथा और नवग्रह शांति पूजा में भाग लेता है, उसे सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक सफलता का मार्ग मिलता है। भावनात्मक कल्याण कि लिए भी यह अनुष्ठान फलदायी माना गया है।