🌿 इस वर्ष एक दुर्लभ संयोग श्राद्ध पंचमी और भरणी नक्षत्र का संगम पितृ मोक्ष का विशेष अवसर
पितृ पक्ष में इस बार पंचमी श्राद्ध भरणी नक्षत्र में पड़ रहा है। भरणी नक्षत्र के अधिपति धर्मराज यम हैं और शास्त्रों में वर्णन है कि इस समय किया गया श्राद्ध विशेष प्रभावशाली होता है। विश्वास है कि इस अवधि में पितृलोक के द्वार खुले रहते हैं और हमारे अर्पण सीधे पितरों तक पहुँचते हैं। धर्मराज यम स्वयं इन अनुष्ठानों की देखरेख करते हैं और पितरों की आत्मा को शांति की ओर अग्रसर करते हैं।
यह पितृ शांति महापूजा दो पवित्र स्थलों पर की जाती है। पहला, गया स्थित धर्मारण्य वेदी, जिसका उल्लेख गया असुर की कथा से जुड़ा है। कहा जाता है कि गया असुर के तप से देवता और मानव दोनों विचलित हो गए थे। भगवान विष्णु ने उन्हें पृथ्वी पर लिटाकर गदा प्रहार किया और तब से उनका शरीर तीर्थ बन गया। भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि यहाँ किया गया पिंडदान और श्राद्ध पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति कराएगा। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि गया में धर्मारण्य तीर्थ पर किया गया पिंडदान 20 पीढ़ियों तक के पितरों की मुक्ति का कारण बनता है।
गया में महापूजा के उपरांत काशी के दशाश्वमेध घाट पर माँ गंगा को महाआरती अर्पित की जाती है। यह आरती जीवित परिवार के मंगल हेतु प्रार्थना मानी जाती है। गया में किए गए पितृ श्राद्ध से आत्माओं को शांति और मोक्ष की प्रार्थना होती है, और काशी की गंगा आरती से उस आशीर्वाद को परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के रूप में बुलाया जाता है। यह संपूर्ण अनुष्ठान परिवारिक कलह, जीवन की रुकावटें और निराशा की स्थिति को दूर करने में सहायक माना जाता है।
🙏 इस पवित्र भरणी नक्षत्र पंचमी पर श्री मंदिर के माध्यम से गया की महापूजा और काशी की महाआरती में सम्मिलित हों।
इसी के साथ यदि आपको अपने किसी दिवंगत-पूर्वज की तिथि याद नहीं तो महालया (सर्वपितृ) अमावस्या पर हो रहे अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्य के भागी बनें।