💰 लाख कोशिशों के बाद भी कर्ज से निकल नहीं पा रहे? विघ्नहर्ता गणेश की शरण में जाएं
क्या आप भी पैसों की तंगी के कारण कर्ज के दलदल में धंसते जा रहे हैं? तमाम कोशिशों के बाद भी धन प्राप्ति का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है? अगर हां, तो आपको जरूरत है गणेश जी के आशीर्वाद की, जिनकी कृपा से हर काम बन जाता है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, ऋण नाशक गणेश स्तोत्र का पाठ करने से आराधक को कर्ज से मुक्ति, आर्थिक समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह दिव्य स्तोत्र न केवल धन-समृद्धि को आकर्षित करता है, बल्कि जीवन से आर्थिक अस्थिरता और दरिद्रता का भी नाश करता है।
भगवान गणेश, जो विघ्नहर्ता, सुखकर्ता और दुखहर्ता के रूप में पूजित हैं, अपने भक्तों के समस्त संकटों को हर लेते हैं। बप्पा के 1008 दिव्य नामों का जाप कर प्रत्येक नाम के साथ दूर्वा चढ़ाने से अपार शुभता और अनंत कृपा प्राप्त होती है। गणपति का प्रिय मिष्ठान मोदक है, जिसका भोग लगाने से वह शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं तथा उसे हर प्रकार की नकारात्मकता से दूर रखते हैं।
🪔 कर्जमुक्ति के लिए बुधवार को ही क्यों होती है गणपति की पूजा? इस कथा से शुरू हुई परंपरा
बुधवार का दिन भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है, इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। माता पार्वती ने जिस दिन भगवान गणेश को अपने दिव्य संकल्प से निर्मित किया था, उस दिन कैलाश पर्वत पर बुधदेव भी उपस्थित थे। जब उन्होंने प्रथम पूज्य गणपति के दर्शन किए तो प्रसन्न होकर अपना दिन बुधवार उन्हें समर्पित कर दिया। तभी से इस दिन को विशेष रूप से श्री गणेश की पूजा का महत्व प्राप्त हुआ।
साथ ही ‘महाकाल की नगरी’ उज्जैन में गणेश जी की आराधना का विशेष प्रभाव माना जाता है, जो स्वयं भगवान शिव की नगरी है, यहां बुधवार के दिन विघ्नहर्ता गणपति को प्रसन्न करने और उनके कृपा प्रसाद से समस्त विघ्नों का नाश करने हेतु भक्त विभिन्न विधियों से पूजा-अर्चना करते हैं। इनमें ऋण नाशक गणेश स्तोत्र पाठ, गणेश दूर्वा अर्चना और मोदक अर्पण को सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है। इस बुधवार उज्जैन के श्री चिंतामण गणेश मंदिर में श्री गणेश ऋण नाशक स्तोत्र पाठ, 1008 गणेश दूर्वा अर्चना और 108 मोदक अर्पण का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पुण्य अवसर में सहभागी बनें और भगवान गणेश की कृपा से अपने जीवन को सुख, समृद्धि और शांति से भरें।