माँ बगलामुखी की साधना को सनातन परंपरा में शत्रु बाधा को शांत करने और न्याय में विजय दिलाने वाली सबसे प्रभावशाली उपासना माना गया है। जब जीवन में कानूनी मामले लंबे समय तक अटके रहें, विरोधी पक्ष बार-बार रुकावटें उत्पन्न करे या अचानक आने वाली समस्याएँ मन को अस्थिर करने लगें, तब माँ बगलामुखी और मृत्युंजय भैरव की संयुक्त साधना को दिव्य सुरक्षा का शक्तिशाली माध्यम माना जाता है।
माँ बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी कहा जाता है। उनका बीज मंत्र- “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय, जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” साधक के पक्ष को मजबूत करने, विरोधियों की नकारात्मकता को रोकने और परिस्थितियों को अनुकूल बनाने की प्रार्थना का प्रतीक माना जाता है। इस विशेष अनुष्ठान में 36,000 मंत्र जाप हल्दी-गांठ की माला से किया जाएगा। हल्दी माँ पीताम्बरा को अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए हल्दी की माला से किया गया जाप अधिक प्रभावशाली और शीघ्र फल देने वाला माना जाता है।
माँ बगलामुखी की साधना के साथ मृत्युंजय भैरव हवन का विशेष महत्व है। बाबा भैरव को देवी की साधना का रक्षक और साधक को अदृश्य सुरक्षा प्रदान करने वाला देव माना जाता है। उनकी उपासना से भय कम होने, अचानक आने वाली परेशानियों से रक्षा मिलने और आत्मविश्वास बढ़ने की भावना जुड़ी होती है। जब देवी और भैरव की संयुक्त पूजा की जाती है, तब यह केवल बाधाओं को शांत करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में स्थिरता और निर्भयता का भाव भी जगाती है।
यह संपूर्ण अनुष्ठान हरिद्वार स्थित माँ बगलामुखी मंदिर में 7 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से संपन्न किया जाएगा। गंगा तट की पवित्र ऊर्जा और सामूहिक मंत्र उच्चारण साधना के प्रभाव को कई गुना बढ़ाने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस दिव्य स्थान पर किया गया जाप साधक के संकल्प को देवी तक शीघ्र पहुँचाता है और जीवन की दिशा को सकारात्मक बनाता है।
आज के समय में कई लोग कानूनी मामलों की लंबी प्रक्रिया, विरोधियों की रुकावट, कार्यों में बार-बार असफलता या अचानक आने वाली समस्याओं से मानसिक रूप से थक जाते हैं। यह विशेष पूजा उन सभी के लिए आस्था का दिव्य अवसर है जो न्याय में विजय, शत्रु बाधा से रक्षा और जीवन में स्थिरता की कामना रखते हैं।
श्री मंदिर के माध्यम से अपने नाम से संकल्प जोड़कर आप इस दुर्लभ अनुष्ठान का भाग बन सकते हैं और माँ बगलामुखी तथा बाबा भैरव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह साधना जीवन में सुरक्षा, आत्मबल और अनुकूल परिणामों का मार्ग बनाने की पवित्र प्रार्थना का माध्यम मानी जाती है।