🌿 साल में चार नवरात्रि होती हैं, जिनमें गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में वर्ष में दो बार मनाया जाने वाला गोपनीय और विशेष व्रत पर्व है। यह मुख्य रूप से आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ता है। यह अन्य नवरात्रियों से अलग है क्योंकि इसमें दस महाविद्याओं की गुप्त साधना और उपासना पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय की साधना, मंत्र-जप और अनुष्ठान व्यक्ति को जीवन में फंसी समस्याओं, मानसिक तनाव और बाधाओं से धीरे-धीरे मुक्त करने में मदद करते हैं।
🌿 गुप्त नवरात्रि का यह समय विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जो कानूनी मामलों, शत्रु बाधाओं या अचानक उत्पन्न कठिन परिस्थितियों से निपटना चाहते हैं। मंत्र-जप और अनुष्ठान नकारात्मक प्रभावों को कमजोर करते हैं, मन में स्थिरता, स्पष्टता और साहस का संचार करते हैं। यह साधना व्यक्ति को जीवन में संतुलन, सुरक्षा और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करती है, जिससे भय और मानसिक दबाव धीरे-धीरे कम होते हैं।
🌿 इस विशेष समय में माँ बगलामुखी और काल भैरव अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं। माँ बगलामुखी शत्रुओं और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करती हैं, जबकि काल भैरव अचानक उत्पन्न संकट और कठिनाइयों से रक्षा करते हैं। इन दोनों की ऊर्जा का संयुक्त अनुष्ठान भक्तों को सुरक्षा, मानसिक साहस, स्पष्ट दृष्टि और जीवन की अनिश्चितताओं से निपटने की शक्ति प्रदान करता है।
🌿 यह अनुष्ठान सिद्धपीठ, बगलामुखी मंदिर में श्री मंदिर के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। सात ब्राह्मणों द्वारा विधिपूर्वक मंत्र जाप और हवन का संचालन किया जाएगा। इस साधना से जीवन की बाधाओं, कानूनी अड़चनों और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा, स्थिरता और आध्यात्मिक संतुलन का अनुभव प्राप्त होता है। भक्त घर बैठे भी इस पवित्र अनुष्ठान में जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और मानसिक शांति का अनुभव कर सकते हैं।