🔱 सनातन धर्म में मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं होते, बल्कि ऐसे केंद्र माने जाते हैं जहां दिव्य शक्ति सक्रिय रूप से कार्य करती है। श्री पीताम्बरपीठ देवी मां बगलामुखी का ऐसा ही एक अत्यंत पावन शक्तिपीठ है। मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं, जिनकी स्तंभन शक्ति—अर्थात अन्याय को रोकने और हानिकारक शक्तियों को शांत करने की शक्ति—यहां विशेष रूप से जाग्रत मानी जाती है। मंदिर परंपरा के अनुसार यह भारत के सबसे प्रभावशाली मां बगलामुखी शक्तिपीठों में से एक है। वर्षों से राजा, योद्धा, राजनेता और न्याय की तलाश करने वाले लोग यहां तब आते रहे हैं, जब युद्ध, विशेषकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष, निर्णायक मोड़ पर पहुंच जाते थे। मान्यता है कि बड़े युद्धों के समय यहां विशेष बगलामुखी हवन किए जाते थे, जिससे शत्रुओं की रणनीतियां निष्क्रिय हो जाती थीं और धर्म की रक्षा होती थी। इसी जीवंत आस्था के कारण आज भी कठिन परिस्थितियों में लोग दतिया की ओर रुख करते हैं।
🔱 जब कानूनी मामले लंबे समय तक अटके रहें, शत्रु आक्रामक हो जाएं या झूठे आरोप मानसिक शांति को भंग करने लगें, तो व्यक्ति स्वयं को कमजोर और दबाव में महसूस करता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार ऐसे समय में नकारात्मक शक्तियां प्रबल हो जाती हैं, जिससे सही निर्णय और न्याय में विलंब होता है। ऐसे क्षणों में भक्त देवी मां बगलामुखी की शरण लेते हैं, जिन्हें शत्रु बुद्धि विनाशिनी कहा जाता है—जो हानिकारक इरादों को रोककर भक्त की रक्षा करती हैं।
🔱 श्री पीताम्बरपीठ में बगलामुखी हवन पूर्ण वैदिक विधि और दृढ़ संकल्प के साथ किया जाता है। यह अनुष्ठान विनाश नहीं, बल्कि नकारात्मकता को स्थिर करने, विरोधी प्रभाव को कमजोर करने और भय व दबाव से घिरी परिस्थितियों में स्पष्टता लाने के लिए होता है। मान्यता है कि इस सिद्ध पीठ से की गई प्रार्थना सीधे और अधिक प्रभाव के साथ मां बगलामुखी तक पहुंचती है, विशेषकर जब भक्त न्याय, सुरक्षा और दृढ़ता की कामना करता है।
🔱 श्री मंदिर के माध्यम से की जाने वाली यह विशेष पूजा इस विश्वास के साथ संपन्न की जाती है कि मां बगलामुखी के सर्वाधिक जाग्रत पीठ से की गई उपासना कठिन कानूनी और विरोधपूर्ण परिस्थितियों में शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक गति को पुनः स्थापित करने में सहायक हो सकती है।