🔱 शनि जयंती पर बाधाओं से मुक्ति, शनि के प्रकोप से शांति और दिव्य सुरक्षा हेतु भगवान शनि व संकट मोचन हनुमान की कृपा प्राप्त करें। 🛡️✨
ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाई जाने वाली शनि जयंती हिंदू धर्म में अत्यंत धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व रखती है। यह तिथि भगवान शनि के जन्म का प्रतीक मानी जाती है। जिन्हें न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि शनि देव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शुभ कर्मों पर कृपा और अशुभ कर्मों पर कठिन परीक्षा देते हैं। इसलिए शनि को आत्मचिंतन, अनुशासन और न्याय का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, शनि का प्रभाव जीवन में गहरा होता है। वे एक ओर व्यक्ति को दिशा और धैर्य प्रदान करते हैं, तो दूसरी ओर उसकी परीक्षा भी लेते हैं। जिनकी कुंडली में शनि प्रतिकूल हो, उन्हें करियर में रुकावटें, पारिवारिक तनाव, मानसिक असंतुलन और आर्थिक समस्याएं आ सकती हैं। ऐसे जातकों के लिए शनि जयंती विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि यह दिन शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करने और संतुलन लाने का उत्तम अवसर होता है।
इस दिन भगवान शनि की पूजा से जीवन में स्थिरता, कर्म सुधार और समृद्धि का मार्ग खुलता है। साथ ही, भगवान हनुमान की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। त्रेता युग की कथा के अनुसार, जब रावण ने शनि सहित नवग्रहों को बंदी बनाया था, तब चिरंजीवी हनुमान जी ने उन्हें मुक्त कराया। इस उपकार के कारण शनि देव ने वचन दिया कि हनुमान भक्तों पर उनका कुप्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए शनि जयंती पर हनुमान पूजन से भी विशेष लाभ प्राप्त होता है, जिससे व्यक्ति को साहस, शक्ति और मानसिक स्थिरता मिलती है। इस पावन अवसर पर श्री मंदिर, उज्जैन स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर में एक दिव्य अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 21 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा संकट मोचन चिरंजीवी हनुमान पूजा एवं शनि शांति यज्ञ संपन्न किया जाएगा। यह विशेष पूजा शनि दोषों को शांत, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य सुरक्षा प्रदान करने का एक प्रभावशाली उपाय मानी जाती है।
आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष अनुष्ठान का भाग बनें और शनि देव व हनुमान जी की कृपा से अपने जीवन में स्थिरता, सफलता और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करें।