🌿सावन की आखिरी एकादशी: पितृ शांति और गंगा अभिषेक पूजा से प्रसन्न हो सकते हैं आपके पूर्वज ✨
हिंदू धर्म में सावन को महादेव का प्रिय और सबसे पवित्र महीना माना गया है। यह महीना भक्त और भगवान के बीच एक आध्यात्मिक पुल का काम करता है। इस महीने की आखिरी एकादशी अपने आप में एक शुभ संयोग है, क्योंकि यह अवसर अब इस साल नहीं आएगा। सावन की आखिरी एकादशी में यदि मां गंगा की निर्मलता जुड़ जाए तो इस जन्म के साथ-साथ पिछले जन्म के पापों को भी पुण्य में बदला जा सकता है। इस ख़ास दिन काशी और गंगोत्री धाम में पितरों को प्रसन्न करने के लिए शांति और गंगा अभिषेक पूजा का आयोजन होने जा रहा है। यह अनुष्ठान पूर्वजों के रुके आशीर्वाद से राहत के साथ-साथ परिवार में कलह दूर कर खुशहाली की नई उम्मीद जगा सकता है।
✨ शास्त्रों के अनुसार, पितृ दोष पूर्वजों की अपूर्ण इच्छाओं और अधूरे कर्मों के कारण उत्पन्न होता है।
जिन लोगों की कुंडली में यह दोष होता है, उन्हें आर्थिक संकट, रिश्तों में तनाव और घर में नकारात्मक ऊर्जा जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। इससे राहत पाने के लिए शास्त्रों में विशेष रूप से सावन एकादशी पर गंगा अभिषेक के साथ पितृ दोष शांति महापूजा करने का विधान बताया गया है। काशी (वाराणसी) को इन अनुष्ठानों के लिए सबसे पवित्र स्थल माना गया है, जहां ये अनुष्ठान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिल सकती है और घर में समृद्धि-सौहार्द्र के बंद दरवाजे खुलने शुरू हो जाते हैं।
✨ साथ ही, गंगोत्री धाम को भी अत्यंत शक्तिशाली और आध्यात्मिक स्थान माना गया है। यही वह स्थान है, जहां राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए बड़ा तप किया था, जिससे प्रसन्न होकर मां गंगा का धरती पर आगमन हुआ। ऐसा माना जाता है कि मां गंगा का पावन जल गहरे कार्मिक बोझ को भी शुद्ध कर सकता है। इसलिए, गंगोत्री में किया गया गंगा अभिषेक पितरों की शांति के लिए बेहद प्रभावी और शुभ हो सकता है।
आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस अनुष्ठान के भागी बनें और अपने परिवार के लिए शांति, समृद्धि और सौहार्द्र का आशीर्वाद प्राप्त करें। 🕉️🌸