👉 बाधाओं से अवसरों तक - परम पाप ग्रह शांति अनुष्ठान 🙏
सावन माह को हिन्दू धर्म में अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक रूप से ऊर्जावान समय माना गया है। यह मास विशेष रूप से तप, ध्यान और भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता के अनुसार भगवान शिव और सावन का संबंध बहुत गहरा है। पुराणों के अनुसार, जब समुद्र मंथन में हलाहल विष निकला, तो भगवान शिव ने उसे अपने गले में धारण कर सृष्टि की रक्षा की। यह दिव्य घटना सावन मास में घटित हुई, जिससे यह मास शिव को विशेष रूप से समर्पित किया गया है। मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा ग्रह दोषों को दूर करने और जीवन में सुख-शांति लाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सावन के पहले मंगलवार को शनि-मंगल की पूजा का विशेष महत्व एवं राहु का नक्षत्र होने के कारण श्री मंदिर द्वारा राहु-केतु दोष निवारण महायज्ञ एवं शनि-मंगल शांति पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
🕉️ सावन में भगवान शिव और राहु-केतु की पूजा का महत्व 🙏
वैदिक ज्योतिष में राहु, केतु, शनि और मंगल को उनके प्रबल कर्म प्रभावों के कारण पाप ग्रह माना जाता है, जो जीवन में संघर्ष, विलंब व कठिनाइयाँ उत्पन्न कर सकते हैं। हालांकि ये ग्रह स्वभाव से नकारात्मक नहीं होते, बल्कि ये ब्रह्मांडीय शक्तियाँ व्यक्ति की कर्म यात्रा को दिशा देती हैं और अनुशासन, धैर्य व आंतरिक परिवर्तन का संदेश देती हैं।राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव से जीवन में मानसिक अशांति, भय, भ्रम, रोग, आकस्मिक बाधाएं और निर्णयों में गलतियां हो सकती हैं। ये ग्रह करियर, वैवाहिक जीवन और स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर डालते हैं।
वहीं शास्त्रों में शनि देव को कर्मों का न्यायाधीश माना गया है, जो व्यक्ति के पूर्व कर्मों के अनुसार उसे फल प्रदान करते हैं। यह ग्रह व्यक्ति को कठिनाइयों के माध्यम से आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है। वहीं मंगल को आकाशीय सेनापति कहा गया है, जो ऊर्जा, साहस और महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। किंतु अशुभ स्थिति में यह ग्रह क्रोध, कानूनी झंझट और जीवन में बाधाएँ उत्पन्न करता है।
इन ग्रहों के संयुक्त प्रभाव से जीवन में करियर रुकावटें, आर्थिक अस्थिरता, भावनात्मक तनाव और अचानक आने वाला दुर्भाग्य देखा जा सकता है। इन्हीं प्रभावों को कम करने के लिए भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथे ज्योतिर्लिंग उज्जैन के श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में राहु-केतु दोष निवारण महायज्ञ एवं शनि-मंगल शांति पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस शुभ अनुष्ठान में भाग लें और दिव्य कृपा से अपनी बाधाओं को नए अवसरों में बदलने का मार्ग प्रशस्त करें।