🔹स्वर्णाकर्षण भैरव की आराधना से खुल सकते हैं समृद्धि के नये द्वार 🌞
भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना एक पावन काल होता है, जो दिव्य ऊर्जा, तपस्या और आत्मचिंतन का प्रतीक है। इस माह में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त अनेक प्रकार के उपाय करते हैं। वहीं भगवान भैरव को भगवान शिव का पंचम अवतार माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, रविवार का दिन भगवान भैरव की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से भैरव जी की पूजा करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी कारण सावन के पहले रविवार को काशी स्थित श्री बटुक भैरव मंदिर में धन स्थिरता, नकारात्मक ऊर्जा संरक्षण और छिपी हुई बाधा निवारण के लिए स्वर्णाकर्षण भैरव पूजा का आयोजन किया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि काशी के कण-कण में शिव विराजमान हैं और शिव के रूप भैरव को काशी में कोतवाल के रूप में पूजा जाता है, इसलिए ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव के प्रिय महीने के पहले रविवार को काशी में भैरव की पूजा करने से दुगुना पुण्य मिलता है। धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए स्वर्णाकर्षण भैरव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। वे अपने हाथ में अक्षय पात्र धारण किए हुए हैं, जो अनंत धन और समृद्धि का प्रतीक है।
🔹माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर ने भगवान भैरव की पूजा क्यों की?🤔
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि देवताओं और असुरों के बीच सौ वर्षों तक चले युद्ध के कारण भगवान कुबेर का खजाना लगभग खत्म हो गया और माँ लक्ष्मी भी धनहीन हो गई थीं। तब वे भगवान शिव के पास सहायता के लिए पहुँचे। शिवजी ने नंदी को भेजकर स्वर्णाकर्षण भैरव की उपासना का उपाय बताया। फिर देवी लक्ष्मी और कुबेर ने कठोर तपस्या करके भगवान भैरव को प्रसन्न किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भैरव प्रकट हुए और अपने चारों हाथों से सोने की वर्षा की, जिससे देवताओं की समृद्धि लौट आई। ऐसी मान्यता है कि भगवान भैरव की पूजा से आर्थिक तंगी, कर्ज और बाधाएं दूर होती हैं। इसलिए रविवार को स्वर्णाकर्षण भैरव की पूजा करने से आर्थिक उन्नति और कर्जमुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। श्री मंदिर के माध्यम से आयोजित इस विशेष पूजा में भाग लेकर भगवान भैरव की कृपा प्राप्त करें।