ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, केतु एक छाया ग्रह है, जिसे बिना सिर वाले सर्प के रूप में दर्शाया गया है। केतु भावनात्मक विरक्ति का प्रतीक है, जो अक्सर रिश्तों में गलतफहमियों और दूरियों का कारण बन सकता है। जन्म कुंडली में यदि केतु अशुभ स्थिति में हो, तो यह जीवन में दिशाहीनता, भ्रम और ठहराव पैदा कर सकता है, जो व्यक्तिगत विकास में बाधा उत्पन्न करता है। केतु द्वारा शासित मूल नक्षत्र को कर्म शुद्धि और बाधाओं को दूर करने के लिए शुभ समय माना गया है। इसी पावन अवसर पर "केतु होरा 7,000 मूल मंत्र जाप" का आयोजन किया जा रहा है, जो केतु की सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए समर्पित है। यह जाप केतु होरा—दिन के 7वें और 14वें घंटे में—किया जाता है, क्योंकि यह समय केतु की आध्यात्मिक ऊर्जा को प्रभावी ढंग से केंद्रित करने के लिए आदर्श माना गया है। मंगलवार को, जब सूर्योदय 6:35 बजे होगा, इस जाप का समय दोपहर 1:57 बजे निर्धारित किया गया है ताकि यह केतु की अनुकूलता के साथ पूरी तरह मेल खाए। यह पवित्र अनुष्ठान न केवल पिछले कर्मों को शुद्ध करने और मानसिक स्पष्टता लाने में सहायक है, बल्कि भावनात्मक संबंधों को मजबूत करने, रिश्तों में सामंजस्य बढ़ाने और संतुलन स्थापित करने के लिए भी अत्यंत प्रभावशाली है।
केतु की अंतर्मुखी और अलगावकारी ऊर्जा को संतुलित करने के लिए "11,000 मंगल गायत्री मंत्र जाप हवन" भी इस अनुष्ठान के साथ किया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह ऊर्जा, उत्साह और रिश्तों को पोषित करने की प्रेरणा का स्वामी है। मंगल की ऊर्जा रिश्तों में प्रतिबद्धता और सामंजस्य लाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। मंगलवार, जो मंगल ग्रह का दिन है, इस हवन की प्रभावशीलता को और बढ़ा देता है, क्योंकि यह मंगल की प्रचंड ऊर्जा को सक्रिय कर जीवन में गतिशीलता और प्रगति लाने में सहायक होता है। मंगल और केतु की इस शक्तिशाली ऊर्जा के संगम से यह अनुष्ठान विशेष रूप से लंबी दूरी के रिश्तों को मजबूत करने, नए रिश्तों में सामंजस्य बढ़ाने, और जीवन में स्थिरता व उन्नति लाने के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस पावन संयोग—मंगलवार और मूल नक्षत्र—के अवसर पर यह अनुष्ठान उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में आयोजित किया जाएगा। श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में सम्मिलित होकर आशीर्वाद प्राप्त करें और अपने संबंधों को सशक्त व सामंजस्यपूर्ण बनाएं।