🌑✨ अमावस्या के बाद खुलेगा गुप्त नवरात्रि का रहस्यमयी द्वार, त्रिकाल देवी की कृपा से आप भी पाएं मनचाही सिद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद 🔥🪔
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को आत्मिक शुद्धि, पूर्वजों की शांति और अदृश्य शक्तियों के प्रभाव को साधने के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। इस बार की अमावस्या और गुप्त नवरात्रि का मिलन एक विशेष आध्यात्मिक अवसर लेकर आया है। यह विलक्षण संधि काल, विशेषकर निशित काल में, देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ और सिद्धिदायक माना गया है। विशेष रूप से तांत्रिक और रहस्यमयी देवी साधना की दृष्टि से यह समय दस महाविद्याओं की कृपा प्राप्त करने हेतु सर्वोत्तम माना गया है।
गुप्त नवरात्रि में महाकाली और माँ तारा की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। माँ काली को "त्रिकाल" कहा जाता है क्योंकि वे भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों को नियंत्रित करती हैं। वे काल के पार की शक्ति हैं, जो साधक के जीवन की बाधाओं को काटकर उसे भयमुक्त बनाती हैं। वहीं माँ तारा, जीवन रक्षक ऊर्जा की प्रतीक हैं, जो मृत्यु तुल्य कष्टों से उबारने वाली करुणामयी देवी मानी जाती हैं। उनकी उपासना से आत्मबल, स्वरक्षा और वाणी में सिद्धि प्राप्त होती है। इसी विशेष संधि काल, अर्थात अमावस्या की समाप्ति और गुप्त नवरात्रि के आरंभ के निशित काल में, त्रिकाल शक्ति दीपम् महा रात्रि यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
🔱 दो सिद्ध शक्तिपीठों से जागृत किया जाएगा यह विशेष दिव्य ऊर्जा का संगम
इस दिव्य यज्ञ को और अधिक प्रभावशाली बनाने हेतु यह अनुष्ठान पश्चिम बंगाल के दो दिव्य और सिद्ध शक्तिपीठों, श्री तारापीठ मंदिर और शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर में संपन्न हो रहा है। इन स्थलों पर देवी की तांत्रिक उपासना का विशेष महत्व है, और यही कारण है कि यहाँ किए गए मंत्र, दीप और यज्ञ विशेष फल देते हैं। यह रात्रिकालीन यज्ञ इच्छाओं की पूर्ति, भय से मुक्ति और अदृश्य शक्ति की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस काल में साधना करने से आत्मा की गहराई से जुड़े अवरोध समाप्त होते हैं और साधक को मानसिक, आध्यात्मिक तथा सांसारिक स्तर पर प्रगति मिलती है।
आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस दिव्य अनुष्ठान के पुण्य के भागी बनें।