🪔सनातन धर्म में राम नवमी को सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। यह पावन पर्व चैत्र शुक्ल नवमी के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म हुआ था, जिन्होंने पृथ्वी पर धर्म, सत्य और आदर्श जीवन का संदेश दिया। रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या नगरी में राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर इक्ष्वाकु वंश में हुआ था। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम का जन्म अधर्म का नाश करने और रावण जैसे असुर राजा का अंत करने के लिए हुआ था। हजारों वर्षों से भक्त इस दिन को गहरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं और भगवान राम को साहस, करुणा, न्याय और धर्म के प्रतीक के रूप में स्मरण करते हैं। इसी पावन अवसर पर श्री मंदिर द्वारा भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त करने के लिए 24 घंटे अखंड रामचरितमानस पाठ और सरयू आरती का महानुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।
✨ अखंड रामचरितमानस पाठ को क्यों माना जाता है विशेष और शुभ?
रामचरितमानस सनातन धर्म का एक महान ग्रंथ है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और उनके महान गुणों को बताने के लिए की थी। यह ग्रंथ केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि जीवन में धर्म, सत्य और कर्तव्य का मार्ग भी दिखाता है। इसी कारण रामचरितमानस का अखंड पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक साधना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसे कराने से जीवन से नकारात्मकता कम होती है और शांति, सुख और समृद्धि का मार्ग खुलता है। यह पाठ 24 घंटे बिना रुके चलता है। इस दौरान भगवान श्रीराम की दिव्य उपस्थिति का आह्वान किया जाता है और साथ ही भगवान शिव और हनुमान जी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस पवित्र पाठ के आयोजन से ग्रह दोष, वास्तु दोष और जीवन की कई बाधाओं का प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
🛕 अयोध्या के प्रसिद्ध श्री प्राचीन राजद्वार मंदिर में इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनें
अयोध्या के श्री प्राचीन राजद्वार मंदिर में यह भव्य अनुष्ठान आयोजित होगा, जिसे प्राचीन मान्यताओं के अनुसार शहर के सबसे पुराने और ऊंचे मंदिरों में से एक माना जाता है। यहां चार विद्वान ब्राह्मणों द्वारा 24 घंटे अखंड रामचरितमानस पाठ किया जाएगा। कथा के अनुसार जब भगवान श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ वनवास के लिए अयोध्या से निकले थे, तब वे इसी मंदिर के मार्ग से होकर गए थे। इस पवित्र अखंड पाठ के साथ सरयू आरती का भी विशेष आयोजन किया जा रहा है, जिससे इस अनुष्ठान का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि सरयू नदी भगवान श्रीराम के जन्म और उनकी दिव्य लीलाओं की साक्षी रही है। इसलिए सरयू आरती को अत्यंत पवित्र माना जाता है।
✨ श्री मंदिर के माध्यम से इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लेकर आप भी भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने घर-परिवार में समृद्धि, उन्नति और सुख का स्वागत कर सकते हैं।