कभी कभी ऐसा लगता है कि मेहनत में कोई कमी नहीं है, फिर भी करियर अपनी गति से आगे नहीं बढ़ रहा। दिन भर की भागदौड़, जिम्मेदारियों का बोझ और भीतर यह सवाल कि आखिर रुकावट आ कहाँ रही है। प्रमोशन टल जाता है, सही समय पर अवसर नहीं मिल पाता या कार्यस्थल पर छोटी छोटी बाधाएँ मन को भारी कर देती हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति केवल बाहरी समाधान नहीं, बल्कि भीतर से संतुलन भी खोजने लगता है। वैदिक दृष्टि से ऐसा माना जाता है कि जब शनि के कर्म प्रभाव और सूर्य की आत्म शक्ति संतुलित नहीं होती, तब प्रयास और परिणाम के बीच दूरी महसूस होने लगती है।
इसी भाव को ध्यान में रखते हुए होरा का महत्व बताया गया है। होरा दिन का वह विशेष समय माना जाता है, जब किसी ग्रह की ऊर्जा अधिक प्रभावी रहती है। यदि उसी समय उस ग्रह से संबंधित साधना की जाए, तो उसे अधिक सार्थक माना जाता है। शनि होरा को देरी, बाधा और कर्मजनित अवरोधों को शांत करने का समय समझा जाता है। वहीं सूर्य होरा आत्मविश्वास, स्पष्ट सोच और आगे बढ़ने की प्रेरणा से जुड़ा माना जाता है। जब साधना इन दोनों समयों में क्रम से की जाती है, तो पहले अवरोधों को शांत करने और फिर प्रगति की ऊर्जा को जागृत करने का भाव जुड़ता है।
इन्हीं ग्रह ऊर्जाओं के संतुलन के लिए 23,000 शनि एवं 7,000 सूर्य तांत्रिक मंत्र जाप होरा विशेष महापूजा शनि नवग्रह मंदिर में सम्पन्न होगी। यह अनुष्ठान रविवार को शनि होरा में प्रारंभ होगा और सूर्य होरा में पूर्ण किया जाएगा। पहले 23,000 शनि तांत्रिक मंत्रों का जाप कर कार्यक्षेत्र की रुकावटों और देरी को शांत करने की भावना से प्रार्थना की जाएगी। इसके बाद 7,000 सूर्य तांत्रिक मंत्रों का जाप कर आत्मबल, सम्मान और सकारात्मक पहचान की ऊर्जा को जागृत करने का संकल्प लिया जाएगा। वैदिक मंत्रों के मध्य हवन भी सम्पन्न होगा, जिससे वातावरण में शुभ भाव जागृत हों।
यदि आप भी अपने प्रयासों को नई स्पष्टता और संतुलन देना चाहते हैं, तो श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष होरा महापूजा में भाग लेकर एक सकारात्मक आध्यात्मिक कदम आगे बढ़ा सकते हैं।