मार्गशीर्ष का महीना हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण इस माह में स्वयं अपने भक्तों का मार्गदर्शन करने आते हैं इसी कारण से इसका नाम मार्गशीर्ष पड़ा। शास्त्रों में उल्लेखित है कि इस मास में किए गए पूजा पाठ का फल अन्य महीनों की अपेक्षा कई गुना अधिक होता है। इसलिए इस माह में शुक्रवार के दिन शक्तिपीठों में देवी की पूजा करना अत्यंत फलदायी साबित होता है। सभी देवी देवताओं की तरह शुक्रवार का दिन माँ लक्ष्मी को समर्पित है जो भक्तों के लिए दिव्य नारी ऊर्जा से जुड़ने और उनका आशीर्वाद पाने बेहद ख़ास माना जाता है। हिंदू धर्म में देवी लक्ष्मी को धन की देवी के रूप में पूजा जाता है। कहते हैं कि जिन लोगों पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है, उन्हें कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है। धार्मिक ग्रंथों में, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए महालक्ष्मी मंत्र जाप यानी “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः” को अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस मंत्र का जाप करने से मां लक्ष्मी अपने भक्तों को अपार धन-संपदा का आशीर्वाद देती है और उन्हें सभी प्रकार की आर्थिक बाधाओं से सुरक्षा भी प्रदान करती है।
वहीं देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूपों में से एक है वैभव लक्ष्मी। लक्ष्मी जी के इस स्वरूप वैभव देने वाला माना गया है। मान्यता है कि मां के इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से दरिद्रता से राहत मिलती है और घर में वैभव का आगमन होता है। ऐसे में शुक्रवार के दिन 11,000 महालक्ष्मी मंत्र जाप, वैभव लक्ष्मी पूजा एवं हवन करना अत्यंत फलदायी हो सकता है। वहीं, यदि यह पूजा किसी शक्तिपीठ में की जाए तो कई गुना फल की प्राप्ति हो सकती है। इसलिए शक्तिपीठ मां महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर में 11,000 महालक्ष्मी मंत्र जाप, वैभव लक्ष्मी पूजा एवं हवन का आयोजन किया जा रहा है। यह मंदिर पवित्र 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में केवल भक्त ही नहीं बल्कि सूर्य देव भी साल में तीन बार माँ महालक्ष्मी को श्रद्धांजलि देते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। ऐसे में आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लें और मां लक्ष्मी से धन और यश का आशीर्वाद प्राप्त करें।